कुरुक्षेत्र। जिले की अनाज मंडियों में धान की बंपर आवक के बीच व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। मंडियों में जगह कम पड़ने के कारण धान की ढेरियां अब सड़कों और धर्मशालाओं के बाहर तक पहुंच गई हैं। फसल का उठान धीमी गति से होने के कारण किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। केडीबी रोड और ब्रह्मसरोवर के आसपास धान से लदे वाहनों की कतार और सड़कों पर फसल के ढेर के कारण दिन-रात जाम की स्थिति बनी हुई है।
मौसम में बदलाव की आशंका को देखते हुए किसानों ने धान की कटाई तेज कर दी है, जिससे मंडियों में अचानक आवक बढ़ गई। इसके मुकाबले उठान की रफ्तार धीमी रहने से मंडियों में जगह का संकट गहरा गया। प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ रही आवक के कारण मौजूदा इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
धान की बढ़ती आवक को देखते हुए प्रशासन ने सात नए खरीद केंद्रों को मंजूरी दी थी। इससे उम्मीद थी कि मुख्य मंडियों पर दबाव कम होगा और किसानों को फसल उतारने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी। हालांकि, पहले से मंडियों में पड़ा धान नहीं उठने के कारण नई फसल के लिए भी जगह बनाना मुश्किल हो रहा है।
किसानों का कहना है कि उन्हें फसल लेकर मंडियों में दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गांव लुखी से धान लेकर पहुंचे किसान जगीर सिंह ने बताया कि थानेसर अनाजमंडी में जगह नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में ब्रह्मसरोवर के पास धान उतारना पड़ा। उनका कहना है कि मौसम खराब होने की आशंका के चलते किसान जल्द फसल बेचकर सुरक्षित करना चाहते हैं, लेकिन मंडियों में भीड़ और धान में नमी की जांच के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है।
डीएफएससी नरेश कुमार के अनुसार, मिलर्स अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे थे, जिसके चलते कई दिनों तक पंजीकरण नहीं हो सका। इस वजह से धान का उठान प्रभावित हुआ और मंडियों में स्थिति बिगड़ी। अब मिलर्स का पंजीकरण होने के बाद उठान में तेजी लाई जा रही है और इसका असर भी दिखाई देने लगा है।
जिले की मंडियों में मंगलवार तक 1 लाख 77 हजार 261 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी थी, जबकि इसमें से केवल 28 हजार 6 मीट्रिक टन यानी करीब 14 फीसदी धान का ही उठान हो पाया था। जिले में धान खरीद की जिम्मेदारी हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को सौंपी गई है।







