करनाल,राकेश कुमार-:हरियाणा के करनाल जिले के विकास कॉलोनी निवासी 24 वर्षीय अर्शदीप सिंह ने अमेरिका में इंसानियत और बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश की,जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। झील में डूब रहे अपने दो दोस्तों की जान बचाने के लिए अर्शदीप ने बिना अपनी परवाह किए दोबारा पानी में छलांग लगा दी। दोनों दोस्तों की जान तो बच गई,लेकिन अर्शदीप खुद गहरे पानी से बाहर नहीं निकल सका और उसकी मौत हो गई। इस हादसे से परिवार और पूरे इलाके में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार अर्शदीप अपने चार-पांच दोस्तों के साथ अमेरिका की एक झील पर घूमने और नहाने गया था। वह तैरना जानता था और पहली बार में सुरक्षित किनारे पर आ गया था। इसी दौरान उसने देखा कि उसके दो साथी गहरे पानी में फंसकर डूबने लगे हैं। दोस्तों को संकट में देखकर उसने बिना देर किए दोबारा झील में छलांग लगा दी। काफी मशक्कत के बाद उसने दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल दिया, लेकिन खुद पानी के तेज बहाव और गहराई में फंस गया।मौके पर मौजूद लोगों ने कुछ समय बाद अर्शदीप को पानी से बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि उसके शरीर में काफी मात्रा में पानी भर जाने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। फिलहाल अमेरिकी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रिया के लिए मोर्चरी में रखवाया है।परिजनों ने बताया कि अर्शदीप वर्ष 2023 में डंकी रूट के जरिए अमेरिका गया था। उसे विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 45 लाख रुपये का कर्ज लिया था। अमेरिका में वह अपनी बुआ-फूफा के पास रहकर उनके बेटे के साथ एक स्टोर में नौकरी कर रहा था। उसका सपना था कि मेहनत कर सबसे पहले परिवार का कर्ज उतारे और फिर मां को बेहतर जिंदगी दे, लेकिन एक हादसे ने उसके सभी सपने अधूरे छोड़ दिए।
परिवार की मुश्किलें पहले ही कम नहीं थीं। करीब दो वर्ष पहले अर्शदीप के पिता प्रगट सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। पिता के जाने के बाद अर्शदीप ही घर का एकमात्र सहारा था। घर में उसकी मां मनप्रीत कौर और शादीशुदा बड़ी बहन हैं। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार गहरे सदमे में है और पूरे घर में मातम पसरा हुआ है।अमेरिका में रह रहे रिश्तेदार शव को भारत भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने में जुटे हैं। वहीं आर्थिक तंगी और लंबी औपचारिकताओं के कारण परिवार की चिंता लगातार बढ़ रही है। परिजनों ने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार से अपील की है कि अर्शदीप का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने में हरसंभव सहायता की जाए ताकि परिवार अपने बेटे का अंतिम दर्शन कर सके और पूरे रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर पाए।अर्शदीप सिंह ने अपने अंतिम क्षणों में भी दूसरों की जान बचाने को प्राथमिकता दी। उसकी बहादुरी और मानवता की यह मिसाल हमेशा याद रखी जाएगी। करनाल के लोगों का कहना है कि अर्शदीप भले ही इस दुनिया से चला गया, लेकिन उसने अपने साहस और बलिदान से सभी के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली।







