कुरुक्षेत्र। हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कुरुक्षेत्र स्थित लोक नायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) नागरिक अस्पताल में प्रदेश के सिविल अस्पतालों की पहली रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस अत्याधुनिक सर्जरी को जर्मनी से प्रशिक्षित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन उपाध्याय के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
यह सर्जरी 62 वर्षीय महिला किरण के दाहिने घुटने पर की गई, जिनके घुटने में करीब 5 डिग्री का डिफार्मिटी एंगल था। ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक तकनीक की मदद से घुटने की स्थिति का सटीक आकलन किया गया और पूरी सर्जरी की विस्तृत योजना तैयार की गई। चिकित्सकों ने जांच के दौरान पाया कि यदि घुटने को पूरी तरह सीधा किया जाता तो दूसरे घुटने पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था। इसे ध्यान में रखते हुए टीम ने घुटने को 2.5 से 3 डिग्री तक ही सीधा करने का निर्णय लिया।
इसके बाद रोबोट को आवश्यक निर्देश देकर हड्डी की बेहद सटीक कटिंग की गई और सफलतापूर्वक इंप्लांट लगाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान रोबोट मरीज के घुटने से जुड़ा रहा और हर चरण की जानकारी चिकित्सकों को देता रहा। इस तरह मुख्यमंत्री के जिले कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल में पहली रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई।
सर्जरी टीम में डॉ. गुंजन उपाध्याय के साथ सीनियर ऑर्थो सर्जन डॉ. अनूप मेहता, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. संदीप और डॉ. देवेंद्र चहल ने अहम भूमिका निभाई। इस उपलब्धि पर जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह और कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. तेजेंद्र चौहान ने पूरी टीम को बधाई दी।
एलएनजेपी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत अब तक 53 घुटना और सात कूल्हा प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। निजी अस्पतालों में घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के पैकेज बंद होने के बाद सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसी को देखते हुए मेरिल लाइफ साइंसेस कंपनी ने अस्पताल को रोबोटिक सर्जरी का डेमो देने के लिए रोबोट उपलब्ध कराया। शुक्रवार को ऑपरेशन थियेटर में रोबोट इंस्टॉल किया गया और शनिवार को सफल सर्जरी की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार रोबोटिक सर्जरी में कट बेहद सटीक लगता है, जिससे रक्तस्राव कम होता है और आसपास की मांसपेशियों व टिश्यू को कम नुकसान पहुंचता है। मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। संक्रमण और इंप्लांट ढीला पड़ने का खतरा भी कम माना जाता है। हालांकि निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी सामान्य घुटना प्रत्यारोपण की तुलना में 60 हजार से एक लाख रुपये तक महंगी होती है।
डॉ. गुंजन उपाध्याय ने बताया कि रोबोट सर्जन का सहायक होता है, जो हड्डी की कटिंग और घुटने की स्थिति का सटीक विश्लेषण करता है। हालांकि अंतिम निर्णय सर्जन का ही होता है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के बाद सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि भविष्य में सरकारी अस्पतालों में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की जा सके और मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत यह महंगा इलाज मुफ्त मिल सके।







