चंडीगढ़ | देश के अन्नदाता के लिए इस मार्च का महीना आफत बनकर आया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च में सामान्य बारिश से 70% अधिक वर्षा हुई है, जिससे कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल गंभीर संकट में है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि आने वाले दिनों में प्रदेश में मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलेगा। पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 22 मार्च को इन विक्षोभों के कारण हिसार, भिवानी, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रेवाड़ी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल और मेवात में तेज हवा चली और कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी हुई। तापमान में गिरावट और कोहरे की संभावना भी बनी हुई है।
फसल पर असर: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने कहा कि बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा है। कुछ क्षेत्रों से फसल गिरने की भी खबरें मिली हैं। इससे उत्पादन में 5-7 प्रतिशत तक की हानि हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि इस समय सिंचाई न करें और फसल की कटाई समय पर करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब गेहूं की बालियाँ सुनहरी होकर पक रही थीं, तभी बारिश और तेज हवाओं ने खड़ी फसल को बिछा दिया। अधिक नमी के कारण गेहूं का दाना काला पड़ सकता है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होगी और मंडियों में सही दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। खेतों में पानी जमा होने से कंबाइन हार्वेस्टर का संचालन भी मुश्किल हो गया है, जिससे कटाई में देरी हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: किसानों को खेतों से जल निकासी का उचित प्रबंध करना चाहिए और मौसम साफ होने तक कटाई रोकनी चाहिए। यदि ओलावृष्टि जारी रही, तो पैदावार में 15-20% तक गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर देश के खाद्य भंडार और कीमतों पर पड़ेगा।







