करनाल, 7 नवंबर – वायु प्रदूषण लोगो के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. प्रदूषण बढने से अस्पतालों में सांस, दमा जैसी बीमारियों की मरीजों की संख्या बढने लगी है। वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन के भी 50 फीसदी मरीज बढ़ गए है। सुबह शाम ठंड और दोपहर में गर्मी होने से भी लोगों के स्वास्थ्य खराब हो रहा है। ऐसे में चिकित्सकों ने अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने की सलाह दी है।
आंखों में जलन के 50 फीसदी मरीज बढ़े
दिवाली पर पटाखों व आतिशबाजी के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ा है। लगातार हवा जहरीली बनी हुई है। दिन के समय तो मौसम साफ रहता है और चटक धूप निकल रही है, लेकिन शाम होते ही स्मॉग की धुंध छाने लगती है जिले में स्मॉग की धुंध और धुआं छाया रहता है, जिससे लोगों को सड़कों पर आने जाने में परेशानी भी हो रहे है। धुएं के कारण आंखों में जलन की समस्या बनी रहने से मरीजों को सांस लेने में दिक्कत बढ़ रही है। जिस कारण जिला अस्पताल से लेकर तमाम सीएचसीज में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। दमा मरीजों ने बताया कि उनको सांस लेने में दिक्कते हो रही है। वही आंखों में जलन के 50 फीसदी मरीज बढ गए है। चिकित्सकों ने मरीजों को सलाह दी कि वह घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करे और बीमारी होने पर समय रहते ही डॉक्टरी सलाह ले और घरों में घरेलू ऊपचार पर भी ध्यान दें.
चिकित्सकों ने दी ये हिदायत
नागरिक अस्पताल में कार्यरत सांस रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदीप ने बताया कि दिवाली के बाद से अस्पताल की ओपीडी में मरीजो की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई है।गले मे खारिश, खांसी, जुकाम,सांस लेने दिक्कत में मरीज आ रहे है।बच्चो और बुजुर्गों को ज्यादा दिक्कत आ रही है। दमा ग्रस्त बुजुर्गों को इनहेलर से भी राहत नही मिल रही है।
डॉक्टर प्रदीप ने लोगो से अपील करते हुए कहा कि मरीज घर में घरेलू उपचार के साथ साथ डॉक्टरी सलाह के साथ चले नही तो इसके परिणाम घातक भी हो सकते है।







