हिसार | हरियाणा में इस वर्ष गर्मी का असर पिछले साल की तुलना में अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। पर्यावरण संरक्षण समिति की बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव चिंताजनक हैं। पिछले वर्ष फरवरी माह में अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस था, जबकि इस बार यह 30 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है। आने वाले महीनों में प्रदेश का तापमान 40 से 45 डिग्री तक जा सकता है।
समिति के चेयरमैन एसडी अरोड़ा ने कहा कि तापमान में असामान्य वृद्धि का सीधा असर हरियाणा की कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है। समय से पहले बढ़ती गर्मी के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। मौसम में अचानक बदलाव से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बैठक में यह भी कहा गया कि ग्रीन हाउस गैसों में बढ़ोतरी और तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। सड़कों, कॉलोनियों और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार के चलते प्रदेश में हरियाली घट रही है, जिससे वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो रहा है। पक्की सड़कों और कंक्रीट के बढ़ते दायरे के कारण वर्षा का पानी जमीन में समाहित नहीं हो पा रहा, जिससे भूजल स्तर पर भी असर पड़ रहा है।
समिति ने निर्णय लिया कि हरियाणा में अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। सूख रहे पौधों की देखभाल, चौक-चौराहों पर त्रिवेणी रोपण और लोगों को जागरूक करने के अभियान तेज किए जाएंगे, ताकि बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सके।







