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पलवल के चाचा-भतीजे का करिश्मा — बिना ईंधन और बिजली के दौड़ेगा ग्रेविटी इंजन

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पलवल, 5 अक्टूबर –पलवल शहर की भाटिया कॉलोनी के रहने वाले चाचा-भतीजे ने ऐसा अनोखा आविष्कार किया है जो विज्ञान की परंपरागत सोच को चुनौती दे रहा है।दोनों ने मिलकर ऐसा ग्रेविटी इंजन तैयार किया है जो बिना किसी पेट्रोल, डीजल या बिजली के चल सकता है।यह इंजन ग्रेविटी की शक्ति को एनर्जी में बदलकर वाहन और मशीनों को चलाने में सक्षम है.आविष्कारकों का दावा है कि यह तकनीक आने वाले समय में ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है।

ग्रेविटी इंजन के निर्माता अंजू तंवर और उनके भतीजे श्रवण का कहना है कि अब इस इंजन से न सिर्फ वाहन चलेंगे, बल्कि बिजली उत्पादन भी संभव है। पहले यह सिर्फ एक कल्पना लगती थी, लेकिन अब उन्होंने इसे हकीकत में बदल दिया है। इस इंजन के पेटेंट के लिए आवेदन भेजा जा चुका है।उनका दावा है कि बहुत जल्द देश-दुनिया में कोई भी वाहन, इंडस्ट्री या बिजली उपकरण इस ग्रेविटी इंजन से चलाया जा सकेगा — बिना प्रदूषण, बिना ईंधन और बिना किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत के।इस अनोखे आविष्कार को देखने के लिए अब देशभर के इंजीनियर और प्रोफेसर पलवल पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि यह विश्व की पहली ऐसी तकनीक है जो एनर्जी सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।

अंजू तंवर ने बताया कि जब उन्होंने इस तकनीक पर काम शुरू किया, तब कई वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह असंभव है। लेकिन 20 साल के लंबे संघर्ष और करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत के बाद उन्हें सफलता मिली।उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें अपनी पैतृक जमीन तक बेचनी पड़ी, लोगों ने मज़ाक भी उड़ाया, लेकिन अब वही लोग उनके इस कमाल के आविष्कार को देखने आ रहे हैं।

इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें चाहे जितना लोड बढ़ा दिया जाए, ऊर्जा की खपत वही रहती है। यहां तक कि इसमें लगी बैटरी को चार्ज करने के लिए कोई बाहरी चार्जिंग की जरूरत नहीं होती — इंजन खुद बैटरी को चार्ज करता है।शुरुआत में उन्होंने वजन उठाने की मशीन, गन्ने का रस निकालने वाली मशीन और वाहन चलाने वाली मशीन तैयार की थी, जो सिर्फ 3 एम्पीयर की मामूली एनर्जी पर चलती है। अब उन्होंने इसमें नए प्रयोग कर इनपुट-आउटपुट एनर्जी अनुपात को दोगुना कर दिया है — जो पहले वैज्ञानिक रूप से असंभव माना जाता था। दुनिया के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक नई दिशा साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस “ग्रेविटी इंजन” पर टिकी हैं, जो शायद आने वाले कल में ईंधनमुक्त भविष्य की शुरुआत बने।

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