चंडीगढ़ | हरियाणा में 370 पटवारियों को कथित तौर पर भ्रष्ट बताकर उनकी गोपनीय सूची लीक करने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस प्रकरण में तीन अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा सिविल सर्विसेज (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत 4 सितंबर 2025 को चार्जशीट जारी की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित सूची अति गोपनीय थी और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जब अखबारों में प्रकाशित खबरों में लिखा गया कि सूची सरकार ने जारी की है, तो क्या अब सरकार इसे वापस ले रही है? इस पर सरकारी वकील ने कहा कि चूंकि सूची सरकार ने जारी ही नहीं की, इसलिए उसे वापस लेने का प्रश्न ही नहीं उठता।
इस पर कोर्ट ने समाचार प्रकाशित करने वाले मीडिया संगठनों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की वकील ने दलील दी कि मंत्री स्वयं कह चुके हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की और भी सूचियां सार्वजनिक की जाएंगी, इसलिए यह कहना गलत है कि यह सूची अधिकारियों की गलती से बाहर आई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ उठाने के लिए यह सूची जारी की गई थी।
बिना किसी आधिकारिक जांच के व्यक्तियों को भ्रष्ट बताना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर उन 370 पटवारियों और 170 निजी व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करे, जिनके नाम भ्रष्ट पटवारियों की सूची में प्रकाशित किए गए थे।







