Home Haryana सिरसा में घग्गर नदी का कहर, 7 हजार एकड़ फसल जलमग्न

सिरसा में घग्गर नदी का कहर, 7 हजार एकड़ फसल जलमग्न

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सिरसा। जिले में घग्गर नदी का पानी लगातार बढ़ने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक करीब 11 गांवों की लगभग 7 हजार एकड़ फसल पानी में डूब गई है। प्रभावित गांवों में पनिहारी, बुर्जकर्मगढ़, फरवाईं खुर्द, फरवाईं कलां, नेजाडेला कलां, अहमदपुर, ढाणी सुखचैन, केलनियां, झोरडऩाली, मल्लेवाला, सहारनी और नेजाडेला खुर्द शामिल हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि सरदूलगढ़ क्षेत्र में शनिवार की तुलना में रविवार को जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद कई किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई है, खासकर छोटे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

हर साल क्यों आती है बाढ़?

विशेषज्ञों का मानना है कि घग्गर नदी में कमजोर जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था के कारण हर साल बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। रिकॉर्ड के अनुसार 1976 से लेकर 2015 तक दर्जनों बार यह नदी तबाही मचा चुकी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट बताती है कि 1993, 1995, 2004 और 2010 की बाढ़ ने पंजाब और हरियाणा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था।

मौजूदा हालात

सिंचाई विभाग के बुलेटिन के अनुसार रविवार शाम को मारकंडा नदी में 11,558 क्यूसिक और टांगरी में 15,834 क्यूसिक पानी दर्ज किया गया। वहीं घग्गर नदी में पंचकूला में 3,718, गुहला चीका में 52,381 और ओटू हैड पर 27,550 क्यूसिक पानी बह रहा है। ओटू हैड से 19,668 क्यूसिक पानी राजस्थान साइफन की ओर छोड़ा जा रहा है।

किसानों की पीड़ा

गांव फरवाईं खुर्द के किसान छिंदा सिंह ने बताया कि उनकी घीया, तोरी, भिंडी और करेले की पूरी फसल पानी में डूब गई है। उनका कहना है कि पिछले साल भी नुकसान हुआ था लेकिन मुआवजा नहीं मिला। “सब्जी बेचकर ही परिवार का गुजारा चलता है, अब सब बर्बाद हो गया,” उन्होंने दुख जताया।

इसी तरह किसान प्रीतम दास ने कहा कि गांव के पास बांध टूटने से लगभग 600 एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है। फिलहाल ग्रामीण और प्रशासन मिलकर तटबंधों को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जलस्तर और बढ़ा तो गांवों पर भी खतरा मंडरा सकता है।

 

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