चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नौ साल पुराने मामले में हरियाणा सरकार की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए तीन हफ्तों में हाईटेंशन बिजली लाइनों के स्थानांतरण पर ताज़ा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
यह मामला 2016 से जुड़ा है, जब पानीपत में एक बच्चा घर की छत से गुजर रही ओवरहेड तारों की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था और हाथ-पांव से अपाहिज हो गया। अखबार में खबर छपने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ नगर निगम क्षेत्रों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों को हटाने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि दक्षिण हरियाणा और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने 2025 में जो आंकड़े दिए, वे 2022 के आंकड़ों से बिल्कुल मेल खाते हैं।
33 केवी लाइनों के मामले में 90 स्थान चिन्हित, 58 हटाई गईं और 32 अब भी लंबित हैं, जबकि 11 केवी लाइनों का डेटा दिया ही नहीं गया। सुनवाई में यह भी सामने आया कि 60 नगरपालिकाओं में 74,232 ढांचों के ऊपर से बिजली लाइनें गुजर रही हैं।
बिजली निगम का कहना है कि अवैध निर्माण हटाने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं की है, जबकि नगर निकायों का कहना है कि बिना स्वीकृत नक्शे के बिजली कनेक्शन नहीं दिए जाने चाहिए थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा—”आप एक ही सरकार का हिस्सा हैं, बैठकर समाधान निकालें, यह दोषारोपण बंद होना चाहिए।”







