चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार की हालिया कैबिनेट मीटिंग में हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की एसओपी को मंजूरी दी गई। लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर एक विवादित पत्र वायरल हो गया, जिसने प्रदेश की सियासत और कर्मचारी वर्ग में हलचल मचा दी। लेटर में दावा किया गया कि सरकार 5 साल से कम सेवा वाले कच्चे कर्मचारियों को हटाने जा रही है।
इस खबर के फैलते ही राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई, जिसके बाद सरकार को सामने आकर इस लेटर का खंडन करना पड़ा।
क्या था वायरल लेटर में?
वायरल पत्र में ये बातें कही गई थीं:
- 5 साल से कम सेवा वाले कच्चे कर्मचारियों को हटाने के आदेश।
- रिक्त पदों पर HKRNL के बजाय नियमित भर्ती के लिए प्रस्ताव।
- ड्राइवरों की कमी पर छह माह के लिए अस्थायी नियुक्तियों की अनुमति।
सरकार ने किया खंडन, कर्मचारियों को दी राहत
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के संदर्भ में प्रवक्ता ने कहा कि वहां तैनात पांच वर्ष से कम सेवा वाले HKRNL कर्मियों को हटाने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सरकार ने दोहराया कि कर्मचारियों के हित सर्वोपरि हैं और कोई भी निर्णय उनके भविष्य और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।
रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की तैयारी
प्रवक्ता ने बताया कि:
- 168 पदों पर HSSC के जरिए नियुक्ति हुई, जिनमें से 155 ने कार्यभार संभाल लिया है।
- शेष रिक्त पदों की सूची HSSC को भेजने का निर्देश दिया गया है ताकि स्थायी भर्तियां जल्द की जा सकें।
सरकार की मंशा– युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार
हरियाणा सरकार का कहना है कि वह नियमित भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। CET परीक्षा के माध्यम से योग्य युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरियों का अवसर दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि:
- स्थायी नौकरियाँ युवाओं को सुरक्षा और करियर में स्थिरता देती हैं।
- इससे प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक मजबूती में भी योगदान मिलता है।







