चंडीगढ़ | हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में शामिल 14 जिलों में 27 लाख 50 हजार से अधिक वाहन ऐसे हैं जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुके हैं, फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों को अब जल्द ही ईंधन नहीं मिलेगा, क्योंकि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक नवंबर से ऐसे वाहनों को ईंधन न देने के आदेश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जिलों में सबसे ज्यादा, करीब 70% वाहन चलन से बाहर हो चुके हैं। जबकि बाकी 11 एनसीआर जिलों में यह आंकड़ा 30% के करीब है। इसके बावजूद यह वाहन न केवल हरियाणा में, बल्कि दिल्ली तक में धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। आयोग का मानना है कि ये वाहन वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं।
पुराने वाहनों की सीमा तय
वायु गुणवत्ता आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में डीजल वाहनों की अधिकतम आयु 10 साल और पेट्रोल वाहनों की 15 साल तय की है। तय सीमा पार करने वाले वाहनों का पंजीकरण स्वतः रद्द माना जाएगा।
पेट्रोल पंपों पर लगेगा हाईटेक सिस्टम
इन आदेशों को लागू करने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के पेट्रोल पंपों पर अक्टूबर 2025 तक ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करके उनकी वैधता जांचेंगे। इसके बाद एक नवंबर 2025 से पुराने वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा।
दिल्ली में स्थिति और गंभीर
आयोग के अनुसार, दिल्ली में 61 लाख से ज्यादा गाड़ियां अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। अब दिल्ली और एनसीआर में सख्त निगरानी और नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव को इस आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
सरकार पहले भी एनसीआर में शामिल जिलों की संख्या कम करने का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रख चुकी है, लेकिन अभी तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है। फिलहाल, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदमों की तैयारी पूरी हो चुकी है।







