कैथल | शहर में बैंकिंग प्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं, जहां दो अलग-अलग मामलों में चैक से जुड़ी गंभीर धोखाधड़ी सामने आई है। इन घटनाओं में बैंक कर्मचारियों की लापरवाही या संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। एक मामला सिविल लाइन थाना में दर्ज किया गया है, जबकि दूसरा सिटी थाना पुलिस को सौंपा गया है। पुलिस दोनों मामलों में गहन जांच कर रही है।
पहला मामला:
खुराना रोड निवासी राजकर्ण ने शिकायत में बताया कि उनका खाता अंबाला रोड स्थित यूनियन बैंक में है। उन्हें दीपक नामक व्यक्ति से 4 लाख रुपये का चैक प्राप्त हुआ था, जिसे उन्होंने 30 अप्रैल को चैक ड्रॉप बॉक्स में जमा किया। लेकिन 1 मई को उन्हें जानकारी मिली कि चैक को बॉक्स से निकालकर उसमें क्रॉस मार्क हटाया गया और किसी अन्य ‘राजकर्ण पुत्र कर्म सिंह’ नामक व्यक्ति के खाते में एचडीएफसी बैंक से भुगतान करवा लिया गया।
राजकर्ण के अनुसार, उनके खाते में कोई राशि नहीं आई जबकि यूनियन बैंक ने बताया कि चैक क्लीयर हो चुका है। बैंक प्रबंधन द्वारा असहयोगात्मक रवैया अपनाने से पीड़ित ने धोखाधड़ी को गंभीर मानते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरा मामला:
पंजाब नैशनल बैंक, करनाल रोड के शाखा प्रबंधक पंकज बखेतिया ने अज्ञात के खिलाफ सिविल लाइन थाना में शिकायत दी है। मामला अमरजीत छाबड़ा फर्म से संबंधित है, जिसके तीन चैक (कुल राशि करीब 25 लाख रुपये) मुंशी द्वारा बैंक में जमा करवाए गए थे। कुछ समय बाद एक अज्ञात व्यक्ति खुद को फर्म का प्रतिनिधि बताकर चैक वापस ले गया।
बाद में जब संबंधित पक्षों को भुगतान नहीं मिला तो छानबीन में यह धोखाधड़ी सामने आई। बैंक ने समय रहते चैक पर रोक लगा दी। हालांकि, आरोपी ने दोबारा बैंक पहुंचकर 6.5 लाख रुपये के चैक की राशि बदलकर 4.5 लाख रुपये पास करवाने की कोशिश की, लेकिन रोक लगने के चलते वह विफल रहा और मौके से फरार हो गया।
पुलिस की कार्रवाई:
सिविल लाइन थाना प्रभारी शिव कुमार शर्मा ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।
इन दोनों घटनाओं ने बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा की खामियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और बैंक प्रबंधन की संयुक्त जिम्मेदारी है कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़कर इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जाए।







