करनाल, 27 मार्च-करनाल जिले की सभी अनाज मंडियों में गेहूं की एक अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी। इसी के अनुसार शहर में करनाल राष्ट्रीय राजमार्ग 44 स्त्तिथ नई अनाज मंडी में भी खरीद होगी, लेकिन वहां की बदहाल स्थिति को देखकर लगता है कि मंडी प्रशासन की तैयारी अभी भी अधूरी है। मंडी में अभी तक किसानों के लिए कोई भी मूलभूत सुविधा मुहैया नहीं कराई जा सकी है। इसमें पेयजल,बदहाल शौचालय,कूड़े के ढेर सहित सुरक्षा को लेकर उचित प्रबंध का नहीं होना मुख्य है। दूसरी तरफ मंडी के जमींदारा शेड में भी अतिक्रमण के कारण किसानों में मंडी प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है।
जमींदारा शेड में अतिक्रमण का आलम:
नई अनाज मंडी के जमींदारा शेड में अतिक्रमण का बोलबाला है। अवैध रूप से ट्रक आदि वाहन खड़े हुए हैं। खरीद सीजन शुरू होने से पहले इस ओर मंडी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में आगामी दिनों में भी यही हाल रहा तो किसानों को अपनी फसल बाहर ही डालनी पड़ेगी। पिछले सीजनों में भी किसानों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा था। सफाई, सड़क व पानी निकासी का अभाव
अनाज मंडी की अधिकतर सड़कों में गहरे-गहरे गड्ढे बने हुए हैं। सीजन शुरू होने से पहले प्रशासन की ओर से इन्हें भरा तक नहीं गया है। इसके अलावा अनाज मंडी परिसर में हर तरफ सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। ऐसा लगता है कि पिछले कई महीनों से मंडी में सफाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, पानी निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां दुकानों से निकलने वाला पानी परिसर में खड़ा हो जाता है। अगर सीजन में बारिश आती है तो किसानों को फसल भीगने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
शौचालयों की हालत खस्ता:
करनाल की नई अनाज मंडी के शौचालयों के हालात इतने खराब है कि मंडी मजदुर खुले में शौच करने को मजबूर हो रहे है। मंडी मजदूरों का कहना है कि बहुत अरसे से यहां सफाई के लिए कोई भी कर्मचारी नही आया है। शौचालय में बहुत ही ज्यादा गन्दगी फैली हुई है। इन सब व्यवस्थाओं की सुध लेने वाला कोई भी नही है।
प्रशासन के दावे हवाहवाई:
वहीं बीते सोमवार को जिले की मंडियों की व्यवस्थाओं के बारे में अतिरिक्त उपायुक्त यश जालुका ने अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें निर्देश दिए गए कि रबी सीजन की फसलों की खरीद को लेकर सभी अनाज मंडियों में समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जाएं। सभी सचिवों को तैयारियां पूर्ण कर लेने का प्रमाणपत्र भी देना होगा। फसलों के उठान में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि ट्रांसपोर्टर तीन घंटे के भीतर निर्धारित समय पर गाड़ी उपलब्ध नहीं कराएगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। गेहूं खरीद का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाएगा।किन्तु अब कुछ ही दिन शेष रह गए है किसान मंडियों में अपनी फसल के लिए तैयार बैठे है।
सरकार को सख्ती से संज्ञान लेने की जरूरत:
वहीं जब इस मामले को लेकर मंडी सुपरवाइजर से बात की गई तो उन्होंने तमाम व्यवस्थाओं तो दुरुस्त बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।हालात जो व्यान कर रहे है उसको नकारा नही जा सकता। ऐसे मामलों में सरकार को सख्ती से संज्ञान लेने की जरूरत है तांकि समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा सके।







