करनाल,1 फरवरी –विगत दिनों हरियाणा महानिदेशक स्वास्थ्य द्वारा सभी सरकारी चिकित्सकों को निर्देश दिए गए थे कि सरकारी अस्पतालों में कोई भी चिकित्सक दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात नही करेगा और ना ही बाहर की दवाइयां लिखेगा। लेकिन करनाल जिले के नागरिक अस्पताल में आदेशों की शरेआम धज्जियां उड़ती हुई नजर आ रही है। ऐसे में यह तो साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि आला अधिकारियों के निर्देशों के कोई भी मायने नही है और बेपरवाह चिकित्सक गरीब लोगों की जेबों पर डाका डालने में कोई भी कसर नही छोड़ रहे है।
ओपीडी के समय सक्रिय रहते दवा कंपनी के प्रतिनिधि:
जिला अस्पताल की ओपीडी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलती है। ओपीडी के समय निजी दवा कंपनी के प्रतिनिधि सक्रिय दिखाई देते है.यह डीजी हेल्थ के आदेशों की पालना तो ठेंगा दिखाया जा रहा है। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि मानसिक रोग और जनरल फिजिशियन की ओपीडी में वह काफी समय तक बैठकर डॉक्टरों से दवाओं पर चर्चा करते दिखाई दिए।
अस्पताल में कमीशन के चक्कर में सरकारी पर्चे की बजाय प्राइवेट पर्चे पर डाॅक्टर लिख रहे दवाएं:
इतना ही नहीं कुछ फिक्स कंपनियों की दवाएं मरीजों को लिखी जाती हैं, जिन पर कमीशन खोरी का गोरख धंधा संचालित किया जा रहा है।यहां तक कि प्रत्येक बीमारी की सरकारी दवाएं केंद्र में मौजूद हैं पर कमीशनखोरी के चक्कर में अस्पताल के डॉक्टर ही मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अस्पताल के पर्चे पर खानापूर्ति के लिए कुछ सरकारी दवा लिखकर निजी पर्चे पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं।
बाजार की दवाएं लिखना गलत:
वहीं जब इस मामले को लेकर सिविल सर्जन लोकवीर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वैसे तो समस्त चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है कि अस्पताल की दवा से ही मरीजों का इलाज करें।दवा कम्पनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात पर रोक लगाई गई है। अगर कोई इस प्रकार से बाहर की दवा लिखता है तो यह गलत है। इस पर संज्ञान लिया जाएगा,इस मामले में अगर किसी भी डॉक्टर की संलिप्तता पाई जाती है तो निश्चित तौर पर कार्यवाही की जाएगी।







