करनाल,28 जनवरी –पशुओं में ब्रूसीलोसिस बीमारी को लेकर हरियाणा पशुपालन विभाग अलर्ट है।ब्रूसीलोसिस गाय, भैंस, भेड़, बकरी, एवं कुत्तों में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी हैं। यह जोनिटिक बीमारी है, जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती है। इस बीमारी से ग्रस्त पशु 7-9 महीने के गर्भकाल में गर्भपात हो जाता है। इस रोग की पशुशाला में बड़े पैमाने पर फैलने की संभावना रहती है। पशुओं में गर्भपात हो जाता है,जिससे भारी आर्थिक हानि होती है। ये बीमारी मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद गंभीर है।
कैसे फैलती है बीमारी:
पशुओं में गाय भैंस में ये रोग ब्रूसेल्ला एबोरटस नामक जीवाणु द्वारा होता है। ये जीवाणू गाभिन पशु के बच्चेदानी में रहता है तथा अंतिम तिमाही में गर्भपात करता है। एक बार संक्रमित हो जाने पर पशु जीवन काल तक इस जीवाणु को अपने दूध तथा गर्भाश्य के स्त्राव में निकालता है।
यह हैं लक्षण:
करनाल सरकारी पशु चिकित्सालय में तैनात पशु चिकित्सक डा. तरसेम राणा ने बताया कि पशुओं में गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में गर्भपात होना इस रोग का प्रमुख लक्षण है। पशुओं में जेर का रूकना एवं गर्भाशय की सूजन एवं नर पशुओं में अंडकोष की सूजन इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। पैरों के जोड़ों पर सूजन आ जाती है जिसे हाइग्रोमा कहते हैं। मनुष्य को इस रोग में तेज बुखार आता है जो बार बार उतरता और चढ़ता रहता है तथा जोड़ों और कमर में दर्द भी होता रहता है।
कैसे करें बचाव व प्रबंधन
-स्वस्थ गाय भैसों के बच्चों में 4-8 माह की आयु में ब्रुसेल्ला एस-19 वैक्सीन से टीकाकरण करवाना चाहिए। ब्रूसीलोसिस संक्रमित पशु को पशुपालक बेचे नही और खरीदे गए पशुओं को ब्रुसेल्ला संक्रमण की जांच किए बिना अन्य स्वस्थ्य पशुओं के साथ कभी नहीं रखना चाहिए।इस रोग का निदान अंतिम तिमाही में गर्भपात का इतिहास, रोगी पशु के योनि स्त्राव, जेर या भ्रूण की जांच पशु प्रयोगशाला में करके की जाती है।
-अगर किसी पशु को गर्भकाल के तीसरी तिमाही में गर्भपात हुआ हो तो उसे तुरंत फार्म के बाकी पशुओं से अलग कर दिया जाना चाहिए। उसके स्त्राव द्वारा अन्य पशुओं में सक्रमण फैल जाता है।
बकरी पालक को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत:
डॉ राणा बताते है कि ब्रूसीलोसिस बीमारी का प्रकोप सबसे ज्यादा बकरियों में देखने को मिलता है। बकरियों में यह वायरस बहुत ही ज्यादा खतरनाक व रोगजनक होता है। इस संक्रमण का बकरियों से इंसानों में फैलने का खतरा ज्यादा बना रहता है।
– पशुपकलको को परामर्श:
डॉ राणा ने बताया कि महीने में 5 से 6 केस ब्रूसीलोसिस बीमारी के आ जाते है। पशुपालक इस बात का ध्यान रखें कि जब कभी भी पशुओं के गर्भकाल से समय अगर जल्दी गर्व पात हो जाये तो जल्द ही पशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं ना कि अपने आप ही उसका इलाज करें,इससे बीमारी बढ़ने का खतरा लगातार बना रहता है।
अगर कोई भी पशु ब्रूसीलोसिस संक्रमित हो जाता है तो पशुपालक उस पशु को बेचे नही ओर घबराएं नही, संक्रमित पशु के दूध को हम अच्छे से उबालकर पी सकते है,उबालने से इसका वायरस खत्म हो जाता है।दूसरा पशुपालक अपने पशुओं की नेचुरल सर्विस ना करवाये जिससे अन्य पशुओं में संक्रमण बढ़ने का खतरा लगातार बना रहता है।







