करनाल,21 जनवरी –अलग अलग राज्यों के किसान मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. सरकारी सब्सिडी के सहयोग से कम जगह और कम समय के साथ ही कम लागत की खेती है और मुनाफा लागत से कई गुना ज्यादा मिल जाता है। अगर इंसान जनूनी हो और कुछ करने की ठान ले तो फिर मंझिलों को पाना कठिन नही होता। बात कर रहे है करनाल के रहने वाले मुनीश की जिन्होंने 4 साल पहले बहुत ही छोटे स्तर से मशरूम की खेती की शुरुआत की और आज वो 2 केनाल में बांस और पराली के 3 शेड बनाकर मशरूम फार्मिंग से लाखों का मुनाफा ले रहे है।
कब और कैसे की शुरुआत:
4 साल पहले मित्र सुशील किसान की प्रेरणा अन्य दो मशरूम फार्मिंग कर रहे किसानों से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मशरूम की खेती की तरफ अपने कदम बढ़ाए।अपने घर मे बने 12/24 के कमरे में उन्होंने मशरूम की खेती की शुरुआत की।3 साल में मेहनत रंग लाई और आज 2 केनाल में 3 शेड बनाकर मशरूम फार्मिंग कर रहे है। उन्होंने बताया कि 3 सालों में मशरूम की खेती में अच्छा मुनाफा होने के बाद उन्होंने अपनी जमीन पर 2 केनाल में 3 शेड बना कर इस खेती को बढ़ाया।
लागत और मुनाफा
किसान मुनीश ने बताया कि शुरू में 70/35 का एक शेड 1.50 से 2 लाख रूपये में तैयार हुआ।खेती के लिए उचित तापमान को बनाये रखने के लिए शेड को पहले पॉलीथिन से फिर पराली डाल कर कवर किया। दूसरे साल में शेड बनाने का खर्चा बच जाने से खेती में लागत कम हो जाती है और मुनाफा अच्छा हो जाता है।
उत्पादन विधि
मुनीश बताते है कि मशरूम को उगाने के लिए कम्पोस्ट की आवश्यकता होती है। कम्पोस्ट भूसा, गेहूं का चापड़, यूरिया एवं जिप्सम को एक साथ मिलाकर व सड़ाकर तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को कई तरह की सूक्ष्मजीव रासायनिक क्रिया द्वारा कार्बनिक पदार्थों का विघटन कर कम्पोस्ट में परिवर्तित कर देते हैं। यह एक जैविक विधि है। फिर इसके बाद बिजाई की जाती है। मशरूम की मौसमी खेती करने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय उपयुक्त माना जाता है।इस दौरान मशरूम की दो फसलें ली जा सकती हैं। मशरूम की खेती के लिए अनुकूल तापमान 15-22 डिग्री सेंटीग्रेट और सापेक्षित नमी 80-90 प्रतिशत होनी चाहिए।मुनीश बताते है इस खेती में ज्यादा पानी की आवश्यकता नही होती। समय समय पर स्प्रे से काम चल जाता है ताकि नमी बनी रहे।
मशरूम का भाव
किसान मुनीश अपनी मशरूम की मार्केटिंग करनाल में ही करते हैं जहां पर उनको मशरूम का रेट 100 रुपये से लेकर 120 रुपये तक मिल जाता है। एक मशरूम का पैकेट 200 ग्राम के करीब का होता है जिसको वे मार्केट में सेल करते हैं।
बीमारियों से निजात
मुनीश ने बताया कि इस खेती में समय और अनुभव का अहम महत्व है। पहली बार की गई खेती में किसान को बीमारी से जूझना पड़ सकता है और अनुभवी किसान को बीमारी का पहले से आभास हो जाता है जिसका वो समय रहते उसका इलाज कर देता है। मशरूम की खेती में बाईट मोल्ड, ग्रीन मोल्ड, और येलो मोल्ड बीमारी, मशरूम को होने वाली बीमारियां हैं। इन बीमारियों के कारण मशरूम का रंग बदल जाता है, वह विकृत हो जाता है, और उसकी पैदावार कम हो जाती है।इन बीमारियों से खेती को बचाने के लिए शेड में कम पानी और ऑक्सीजन को बनाये रखना वेहद जरूरी हो जाता है। तांकि इन बीमारियों से खेती को नुकसान से बचाया जा सके।
किसान भाइयों को सलाह
मुनीश बताते है कि अगर किसान भाई अलग अलग किस्म की फसल उगाते है तो मुनाफा ज्यादा होने सम्भावना बढ़ जाती है क्योंकि इस किस किस्म की खेती से थोड़े समय मे ही कम लागत और ज्यादा मुनाफा मिल जाता है।







