करनाल,19 दिसंबर -सर्दी के मौसम में नॉन वेज के शौकिनों में बढ़ती मछली की मांग से मछली पालकों की चांदी हो रही है।रेस्टोरेंट में मछली से जुड़े हुए विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे जा रहे है, इसके चलते बाजार में मछली की मांग भी बढ़ी है। बढ़ती मांग से मछली पालकों को लाखो का मुनाफा हो रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में मछली पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है,जिसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण विकास एवं अर्थव्यवस्था में मछली पालन
की महत्वपूर्ण भूमिका है। मछली पालन के द्वारा रोजगार सृजन तथा आय में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं।ऐसे में हम बात कर रहे है एक ऐसे सक्ष की. जिसने छोटे स्तर से मछली पालन की शुरुआत कर अब एक बड़े स्तर पर मछली पालन उद्योग चला रहे है नाम है जय भगवान।
कैसे और कब की शुरुआत :
करनाल के रहने वाले जय भगवान ने रोजगार के लिए मछली पालन व्यवसाय को अपनाया। 2008 में अपने एक मित्र के साथ मिलकर उन्होंने इस उधोग की शुरुआत की। धीरे धीरे उन्होंने करनाल के काछवा रोड के पास 15 एकड़ जमीन पर तलाब बनाये और इसमें भिन्न भिन्न प्रकार की जिसकी मार्कीट में डिमांड है का पालन किया। मछलियों के बड़े होने पर उनको देश की अलग अलग मंडियों में बेचने के लिए ले जाया जाता है जहां उनको इसका अच्छा मुनाफा मिल जाता है। एक किलो मछली से 30 से 40 रुपये का मुनाफा मिल जाता है जो काफी है। इस प्रकार जय भगवान ने एक बड़ा व्यवसाय खड़ा किया।
मछली पालन की विधि:
जय भगवान बताते है कि शुरू में जमीन पर तालाबो की खुदाई की जाती है। फिर इसमें ऊपर तक पानी भरा जाता है। अपने फार्म पर की मछली के बच्चे को तैयार किया जाता है। उसके बाद बच्चों को इन्ही तलाबों में डाल दिया जाता है। जय भगवान ने बताया कि चार लेयर में मछली रखा जाता है।
पाली हुई मछली की किस्मे:
एक तलाब में मराकी मछली जो नीचे की खुराक खाती है।दूसरे तलाब में गोल्डन मछली है जो तालाब के बीच की खुराक खाती है।तीसरे तलाब में राउ मछली है जो बीच की खुराक खाती है और चौथे तलाब में कतला मछली है जो सिर्फ ऊपर की खुराक खाती है।
देखरेख कैसे होती:
जय भगवान बताते है इस सारे काम को 5 से 6 लोग देखते है। समय पर मछलियों को उनके हिसाब से खुराक दी जाती है। तालाबो के पानी को समय समय पर बदला जाता है तांकि तालाबो का पानी साफ रहे।मछलियों की ग्रोथ गर्मियों में ज्यादा होती है।
बीमारियों के लिए रोकथाम:
जय भगवान ने बताया कि सर्दियों में मछलियों को बीमारियों से बचाना पड़ता है। सर्दियों में मछलियों के मास में जुएं लग जाती है। जब इस प्रकार की बीमारी लग जाती है तो मछलियों की खुराक में दवाई.मिलाकर दी जाती है तो इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। गर्मियों में मछलियों में गैस की बीमारी की दिक्कत हो जाती है जिससे ऑक्सिजन की कमी हो जाती है और मछलियां मरने की कगार पर भी आ जाती है। जिसके लिए जिओलेट दवाई का प्रयोग खुराक में मिलाकर करने से बीमारी से निजात मिलती है।
सरकार से क्या लाभ मिलता है:
जयभगवान ने बताया कि इस व्यवसाय में सरकार अच्छी सब्सिडी देती है। 5 किले पर 7 से 8 लाख की सब्सिडी सरकार से मिल जाती है। जनरल केटेगिरी में 40 प्रतिशत व एस सी बीसी में 60 प्रतिशत सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाती है।
मछली पालन चाहवान लोगो को सलाह:
जयभगवान ने बताया कि ढाई एकड़ में तलाब की खुदाई के लिये 3 से 4 लाख रुपये सरकार की तरफ से सब्सिडी मिल जाती है। मछली पालन का तकनीकी प्रशिक्षण लेने के बाद मार्च के महीने में 2 एकड़ जमीन पर कोई भी इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकता है। सर्दी के मौसम में जमीन पर तलाब के लिए खुदाई करें और मार्च के महीने में पानी भर कर मछली पालन शुरू करें। इस व्यवसाय को शुरू करने में 4 लाख तक का खर्चा आ जाता है। इसके साथ जय भगवान ने बताया कि तलाबो के किनारे फल,फूल सब्जियों का व्यवसाय भी किया जा सकता है जिससे आर्थिक लाभ में और भी मजबूती आएगी।
जय भगवान के मछली फार्म पर काम करने वाले विजय बहादुर ने बताया कि जैसे 5 एकड़ जमीन पर तलाब की खुदाई का खर्चा करीब 10 से 12 लाख आ जाता है। सरकार की तरफ से 60% सब्सिडी मिल जाती है। फिर जाल लगाने पर 40%,इसके साथ खाद,खुराक व मछली बच्चे के लिए भी 40% सब्सिडी मिलती है। विजय बहादुर ने बताया कि मछली बेचने के लिए थोड़ी दिक्कत है। इसे बेचने के लिए हमे अलग अलग मंडियों में जाना पड़ता है। करनाल जिले में इसके लिए कोई मंडी नही है जो कि होनी चाहिए। विजय बहादुर ने सरकार से अपील की है छोटे किसानों के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा सब्सिडी देने का प्रवाधान करें।







