हिसार 7 दिसम्बर —–गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में धरनारत शिक्षकों का धरना आज 62 दिन जारी रहा। धरने पर बैठी शिक्षिका ने बताया कि जब उनके द्वारा विश्वविद्यालय में की गई शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो उन्होंने सरकार के उच्च अधिकारियों, राज्यपाल, मुख्यमंत्री से शिकायत की, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक तरफ तो लीपापोती के लिए अलग अलग समितियां बना दी और ये दिखाना चाह रहे हैं कि हम समाधान कर रहे हैं, और दूसरी तरफ मुझे और मेरा समर्थन करने वाले शिक्षकों को आय दिन नए नए नोटिस थमा कर और दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
शिक्षिका ने बताया कि कुलपति के द्वारा गठित समिति के सदस्य उनके साथ हो रही प्रताड़ना की वही बातें उनसे पूछते हैं जो कि वे पहले ही बार बार बता चुकी हैं, परंतु उनकी प्रताड़ना के पीछे जो जिम्मेदार है, उससे कोई पूछताछ नहीं की जाती।
विश्वविद्यालय के कुलपति ऐसा करके क्या दिखाना चाह रहे हैं? क्या विश्वविद्यालय उनकी निजी संपत्ति है? उन्होंने विश्वविद्यालय में ऐसा वातावरण बना रखा है जैसे कि विश्वविद्यालय उनकी निजी संपत्ति है और उसमें कोई नियम कायदा लागू नहीं होता और वह जो चाहे वही कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षिका की तनख्वाह रोक रखी है उन्हें उनके समर्थकों को एवं परिवार को अत्यंत प्रताड़ित कर रखा है, शिक्षिका को उनकी लैब में से बाहर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन के इन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सरकार को कम से कम विश्वविद्यालय को उनकी निजी संपत्ति घोषित कर देना चाहिए जिससे अब यहां कोई यह उम्मीद ना रखें कि विश्वविद्यालय किसी कायदे कानून से चलेगा।







