23 नवंबर, फरीदाबाद – 1962 की लड़ाई में मात्र 22 वर्ष की उम्र में शहादत देने वाले शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट छत्रपति सिंह का आज ऊंचा गांव स्थित शहीद स्मारक पर 62 वा जहा शहादत दिवस मनाया गया वही द्वितीय विश्व युद्ध में सेना का तीसरा सबसे बड़ा पुरस्कार वीर चक्र प्राप्त करने वाले उनके पिता कर्नल गिरधारी सिंह, को भी याद करते हुए संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जहां परिजन मौजूद रहे वहीं सेना के रिटायर्ड अधिकारी भी पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की तथा पिता पुत्र की गौरव गाथा के बारे में जानकारी दी। आपको बता दे हर साल परिजनों द्वारा 23 नवंबर को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर सूबेदार मेजर रहे जयचंद ने और अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद हरियाणा के अध्यक्ष करण गोपाल सिंह ने कहा कि देश का तिरंगा जो आज लहरा रहा है वह हवा से नहीं बल्कि शहीदों की सांसों से लहरा रहा है। उन्होंने बताया कि जहां शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट छत्रपति सिंह के पिता कर्नल गिरधारी सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध में बहादुरी का परिचय देते हुए सेना का सर्वोच्च तीसरा पुरस्कार वीर चक्र प्राप्त किया था वही उनके पुत्र शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट छत्रपति सिंह ने मात्र 22 वर्ष की आयु में 1962 के युद्ध में अपनी शहादत दी थी और आज 62 वे बलिदान दिवस के उपलक्ष में वह श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पहुंचे हैं। उन्होंने परिजनों का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि यह लोग हर साल बलिदान दिवस पर उन्हें यहां बुलाते हैं और हम चाहते हैं कि इनसे प्रेरणा लेकर देश के युवाओं में भी देश भक्ति की भावना पैदा हो।
वही इस मौके पर शहीद परिवार के परिजन उधम सिंह राणा और पैरालंपिक शूटर सिंह राज आधाना ने कहा कि उन्हें गर्व है उन्होंने ऐसे परिवार में जन्म लिया है जिसको लेकर वह गर्व की महसूस कर रहे हैं। पैरालंपिक शूटर सिंह राज अधना ने कहा कि वह सभी का धन्यवाद करते हैं जो इस बलिदान दिवस में श्रद्धांजलि जिले देने पहुंचे हैं और उन्हें गर्व है कि वह शहीद फौजियों के परिवार से हैं जिनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने पैरालंपिक शूटिंग में बंदूक का कमाल दिखाया।







