करनाल, 14 नवंबर – बाल दिवस पर हरियाणा प्रदेश के राज्यपाल बंगारू दत्तात्रेय करनाल स्थित श्रवण एवं वाणी निशक्त केंद्र में पहुंचे। जहां उन्होंने बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इससे पूर्व राज्यपाल के कार्यक्रम में पहुंचने पर पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर केंद्र के बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसका सभी आए हुए अतिथियों अपने खूब आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने केंद्र में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली और बच्चों से बातचीत की।
मुक बधिरों और दिव्यांगों के लिए प्रदेश सरकार का काम सराहनीय
मीडिया से बातचीत में राज्यपाल बंगारू दत्तात्रेय ने कहा की बाल दिवस पंडित नेहरू की याद में मनाया जाता है। पंडित नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे इसीलिए इस दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि एवं नमन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज इस केंद्र में आने पर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है। इस केंद्र को आगे बढ़ाने के लिए सुचारू रूप से काम चल रहा है। केंद्र में मूक एवं बधिर बच्चों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे उन्हें रोजगार मिल सके। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई की सांकेतिक भाषा का हरियाणा से ही उदय हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से इस भाषा को एक सांकेतिक भाषा के रूप में सीखने के लिए आह्वान किया है। सारे बधिर समाज को हमारे साथ मिलने के लिए इसे सभी को सीखना चाहिए। वे हमारे साथ ही है हमारा अंतर भाग है, हमसे अलग नहीं है इसीलिए मोदी जी ने नई शिक्षा नीति में सांकेतिक शब्दावली को एक भाषा के रूप में मान्यता दी है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि मूक बधिरों के लिए हरियाणा सरकार भी विशेष कार्य कर रही है और 18 साल से ऊपर के बधिरों को 2500 मासिक पेंशन दी जा रही है। इसके अलावा दिव्यांगों, मूक बधिरों की नौकरियों के लिए अच्छा प्रयास किया जा रहा है। राज्यपाल बंगारू दत्तात्रेय ने ऐसे केंद्रों को प्रोत्साहन देने के लिए सामाजिक संस्थाओं से आगे आने का आह्वान किया।
एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि कल विधानसभा में जो मेरा भाषण हुआ है वह जनता द्वारा भाजपा सरकार को दिए जनादेश का ही एक प्रतिरूप था। इस जनादेश को सामने रखते हुए सरकार भी पिछड़ों, एससी एसटी, महिलाओं और किसानों के लिए काम कर रही है। साथ ही हरियाणा एक हरियाणवी एक की भावना पैदा करने के लिए ही मैंने अपने भाषण में दोहराया है।







