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सिक्किम और गुजरात के बाद अब हरियाणा बनेगा प्राकृतिक खेती का मॉडल-राज्यपाल आचार्य देवव्रत

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करनाल : चन्द्रिका ( TSN)- किसानों को प्रकृतिक खेती का मंत्र देने के लिए आज करनाल के डॉ मंगलसेन ऑडिटोरियम में किसान ज्ञानशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्राकृतिक खेती की मुहिम चला रहे गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज किसानों की पाठशाला में गुरुजी बनकर उन्हें प्रकृतिक खेती का मंत्र दिया। किसान ज्ञानशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने गोबर धन से धरती माता का संवर्धन करने का आह्वान किया।
 राज्यपाल ने कहा कि जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में जमीन आसमान का फर्क है। कृषि वैज्ञानिक भी इस के अंतर को अधिकतर नही समझ पा रहे है। प्राकृतिक खेती से पर्यावरण एवं ऐसे सूक्ष्म कीटाणुओं की रक्षा होती है जो मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज़रूरी होते हैं। उन्होंने कहा कि आज गुजरात मे दस लाख किसान इसकी खेती करते है। मै  खुद अपने गुरुकुल में 80 एकड़ में प्राकृतिक खेती करता हूँ।
हमारे देश के विज़नरी लीडर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में बैक टू बेसिक के मंत्र के साथ ज़ीरो बजटीय प्राकृतिक खेती को गति दी है।राज्यपाल ने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि वर्तमान में खेती के लिए रसायनों आदि की भारी कीमत चुकाने के लिए किसानों को कर्ज का सहारा लेना पड़ता है और कर्ज का यह बोझ बढ़ता ही जाता है।
किसानों को दिलाया प्राकृतिक खेती का संकल्प
आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसान रासायनिक खाद, कीटनाशक और पेस्टीसाइड के प्रयोग से न केवल कर्ज में डूब रहा है बल्कि खेतों में जहर की खेती कर रहे हैं। अनाज सब्जियों के माध्यम से यही जहर हमारे शरीर में जाता है। जिससे आज कैंसर, हार्ट अटैक, रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियां लगातार फैल रही हैं। यदि हमें अपने परिवार और समाज को स्वस्थ रखना है तो हमें प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा। गाय से प्राप्त सप्ताह भर के गोबर एवं गौमूत्र से निर्मित घोल का खेत में छिड़काव खाद का काम करता है और भूमि की उर्वरकता का हृास भी नहीं होता है। इसके इस्तेमाल से एक ओर जहां गुणवत्तापूर्ण उपज होती है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन लागत लगभग शून्य रहती है।ज्ञानशाला में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों को प्राकृतिक खेती का संकल्प दिलाया। वहीं किसान ज्ञानशाला में आए किसानों ने कहा कि वर्तमान खेती की तुलना में प्रकृतिक खेती न केवल अधिक गुणवत्ता पूर्ण है बल्कि इसमें लागत भी शून्य रहती है। उन्होंने कहा की बीमारियों से बचने के लिए हमें प्राकृतिक खेती की ओर जाना ही होगा।

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