कथैल(TSN): पराली नहीं जलाने के जीरो बर्निंग लक्ष्य को सभी के सांझे प्रयासों से प्राप्त किया जा सकता है। पराली प्रबंधन जहां किसानों की आमदनी का बेहतर जरिया है, वहीं वातावरण व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इस वर्ष जिला कैथल ने पराली नहीं जलाने की घटनाओं में 60 प्रतिशत की कमी लाकर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्र के किसान बधाई के पात्र हैं। यह बात हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन सेवानिवृत आईएएस अधिकारी पी.राघवेंद्र राव ने आज लघु सचिवालय के सभागार में जिला प्रशासन व डिलोईट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पराली में सहयोग व अच्छा कार्य करने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित करने के दौरान कही।
उन्होंने कहा की पराली प्रबंधन की दिशा में जिला ने अच्छा कार्य किया है। इतना ही नहीं प्रदेश स्तर पर भी जो पराली प्रबंधन किया गया, उसकी सराहना सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ केंद्र सरकार ने भी की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से लगातार प्रदेश में पराली प्रबंधन की दिशा में अच्छा कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा की सरकार की ओर से जो ग्राम पंचायतें रेड से यैलो और ग्रीन जोन में आती है, उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। जो ग्राम पंचायतें ग्रीन जोन को मेंटेन रख रही है, उन्हें भी प्रोत्साहित करने की योजना पर कार्य चल रहा है। जिला में जो अच्छा कार्य किया है, उसे यूं ही बनाकर रखें और भविष्य में एक शपथ भी लें की इसे और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा की पर्यावरण प्रदूषण को रोकना हम सबकी सांझी जिम्मेवारी है। पराली जलाने से जहां जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म होती है, वहीं हमारे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हम अगर इसी प्रकार इस दिशा में कार्य करते रहेंगे तो निश्चित तौर पर भविष्य में आने वाली पीढ़ी कह सकेगी कि कभी प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं हुआ करती थी। उन्होंने कहा की डिलोईट द्वारा जिला में विभिन्न सोपानों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने का कार्य किया गया है।







