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CM मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक…ग्रामीण परिवारों को पानी के बिल माफ करने की मंजूरी

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चंडीगढ़ : चन्द्रिका ( TSN)- मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।  इस निर्णय के तहत सरचार्ज और ब्याज सहित बकाया पानी के शुल्क की 374.28 करोड़ रुपये की माफी को मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में बुधवार को चंडीगढ़ में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत देते हुए सरचार्ज और ब्याज सहित बकाया पानी के शुल्क की 374.28 करोड़ रुपये की माफी को मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार के इस कदम से राज्य भर में सामान्य श्रेणियों और अनुसूचित जाति के करोड़ों पेयजल उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इस निर्णय से राज्य भर के ग्रामीण क्षेत्रों में 28.87 लाख पानी के  कनेक्शन धारकों को राहत मिलेगी। हालांकि, यह छूट जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थागत, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए लागू नहीं है। कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों के सभी प्रकार के उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2022 तक जमा 336.35 करोड़ रुपये की पेयजल शुल्क माफी को मंजूरी दे दी है। इसमें सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति वर्ग भी शामिल है। इसके अलावा कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में 1 अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2023 तक जमा हुए पेयजल  शुल्क पर कुल 37.93 करोड़ रुपये का सरचार्ज और ब्याज माफ करने को भी मंजूरी दी।
हरियाणा वन विभाग में भर्तियों को लेकर ये फैसला 
मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य वन कार्यकारी अनुभाग (ग्रुप-ग) सेवा नियम, 1998 में काडर से संबंधित पात्रता मानदंड और भर्ती शर्तों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। हरियाणा राज्य वन कार्यकारी अनुभाग (ग्रुप-ग) सेवा (संशोधन) नियम, 2023 आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे। वर्तमान में, विभाग में वन रेंजरों के 126 पद हैं, जिनमें से 67 प्रतिशत हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा भरे जाते हैं तथा 33 प्रतिशत पर डिप्टी रेंजरों से पदोन्नति द्वारा नियुक्ति की जाती है। मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा वन्य प्राणी परिरक्षण विभाग, राज्य सेवा, कार्यकारी (ग्रुप-क तथा ग्रुप -ख) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। ये नियम हरियाणा वन्य प्राणी परिरक्षण विभाग, राज्य सेवा, कार्यकारी ( ग्रुप-क तथा  ग्रुप-ख) सेवा (संशोधन) नियम, 2023 कहे जाएंगे। संशोधन के अनुसार, मुख्य वन्य जीव वार्डन का पद राज्य नियमों से हटा दिया गया है, क्योंकि अब इसे भारत सरकार द्वारा भारतीय वन सेवा (हरियाणा कैडर) में पीसीसीएफ स्तर पर शामिल किया गया है। यह संशोधन सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं और दिशा-निर्देशों के अनुपालन में किया गया है।
परिवहन निरीक्षकों को चालान करने की शक्तियां प्रदान करने की मंजूरी
 मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में परिवहन विभाग की प्रवर्तन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा मोटर वाहन नियम 1993 के नियम 225 के तहत परिवहन निरीक्षकों को चालान करने की शक्तियां प्रदान करने की मंजूरी दी गई। वर्तमान में राज्य में परिवहन निरीक्षकों के 114 पद हैं, परिवहन विभाग में मुख्य रूप से 66 अधिकारियों को पहले ही प्रवर्तन ड्यूटी पर तैनात किया गया है। ये प्रवर्तन अधिकारी 22 डीटीओ-सह-सचिव आरटीए, 22 मोटर वाहन अधिकारी (प्रवर्तन) और 7 सहायक सचिव स्तर तक के अधिकारी से अतिरिक्त होंगे । राज्य भर में विस्तारित प्रवर्तन क्षमताओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने हरियाणा मोटर वाहन नियम 1993 के नियम 225 के तहत इन ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर को चालान करने की शक्तियों के विस्तार को मंजूरी दी है। इस प्रकार अतिरिक्त अधिकारियों को चालान की शक्तियां देकर, हरियाणा सरकार मोटर वाहन अधिनियम का बेहतर कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी, इससे राज्य भर में सुरक्षित और अधिक विनियमित परिवहन सेवाओं में सहयोग मिलेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में इन पर लगी मोहर 
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में इको-टूरिज्म के विकास की नीति को भी मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में हरियाणा शैक्षिक महाविद्यालय संवर्ग ग्रुप-ख सेवा नियम, 1986 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। इन नियमों को हरियाणा शैक्षिक महाविद्यालय संवर्ग  ग्रुप  -ख सेवा (संशोधन) नियम, 2023 कहा जाएगा। संशोधन के अनुसार, पात्रता के लिए किसी भारतीय विश्वविद्यालय से संबंधित/सुसंगत/सम्बद्ध विषय में 55 प्रतिशत अंकों सहित मास्टर डिग्री (अथवा जहां कहीं भी ग्रेडिंग प्रणाली का अनुसरण किया जाता है, वहां पॉइंट-स्केल में समकक्ष ग्रेड) के साथ बेहतर शैक्षणिक रिकॉर्ड या किसी प्रत्यायित विदेशी विश्वविद्यालय से समकक्ष डिग्री, को शामिल किया गया है। सीधी भर्ती हेतु पात्रता के प्रयोजन के लिए हरियाणा राज्य की अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों/पिछड़े वर्ग क तथा ख (असंपन्न वर्ग)/निशक्त (क) दृष्टिहीनता अथवा निम्न दृष्यता, (ख) बधिर और कम सुनाई देना, (ग) सेरेब्रल पालसी, कुष्ठ उपचारित, नाटापन, अम्लीय हमले के पीड़ित और मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी सहित लोकोमोटर निशक्तता (घ) विचार भ्रम (आटिज्म), बौद्धिक निशक्तला, विशिष्ट अधिगम निशक्तता और मानसिक अस्वस्थता। गूंगापन-अंधापन सहित (क) से (घ) के अन्तर्गत व्यक्तियों में से बहु निशक्त्तता) से संबंधित अभ्यर्थियों के लिए स्नातक स्तर के साथ-साथ स्नातकोत्तर स्तर पर पाँच प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। 55 प्रतिशत के पात्रता अकों (अथवा जहां कहीं भी ग्रेडिंग प्रणाली का अनुसरण किया जाता है, वहां प्वॉइंट स्केल में समकक्ष ग्रेड) और किसी रियायत अंक प्रक्रिया को शामिल किये बिना केवल अर्हता अंको के आधार पर उपरोक्त वर्णित वर्गों के लिए 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अथवा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा संचालित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) अथवा यूजीसी द्वारा प्रत्यायित समरूप परीक्षा, जैसे एसएलईटी/एसईटी अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (एम.फिल/पीएचडी डिग्री प्रदान करने के लिए न्यूनतम मानक और प्रक्रिया) विनियम, 2009 या 2016 और समय-समय पर इनमें बाद में किए गए संशोधनों, जैसी भी स्थिति हो, के अनुसार पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई हो, उन्हें एनईटी/एलएलईटी/एसईटी से छूट प्रदान की जाएगी। इन शर्तों को संबंधित विश्वविद्यालय के कुल सचिव अथवा संकाय अध्यक्ष (शैक्षणिक कार्य) द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

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