कुरुक्षेत्र(TSN):अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर जहां पूरे देश भर से शिल्पकार व कलाकार अपनी प्रदर्शनी लगाई हुए हैं तो वहीं हरियाणा सरकार के विभाग के द्वारा भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर प्रदर्शनी लगाई गई हैं, जो संबंधित विभाग की जानकारी यहां पर आने वाले पर्यटकों को दे रही है ताकि वह योजना की जानकारी पाकर इस योजना का लाभ उठा सके।
सिंचाई विभाग की ओर से भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर हरियाणा में सूक्ष्म सिंचाई विधि के ऊपर एक प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां पर सूक्ष्म सिंचाई करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर एक छोटा सा मॉडल लगाया गया है और सूक्ष्म सिंचाई विधि को उस मॉडल के जरिए समझाया गया है। मॉडल के माध्यम से बताया जा रहा हैं की सूक्ष्म सिंचाई विधि क्या है और इससे आने वाले समय में हरियाणा में कितना फायदा होने वाला है, क्योंकि हरियाणा में क़ई ब्लॉक डार्क जोन में आ चुके हैं जहां पानी का बड़ा संकट खड़ा हो चुका हैं।
सिंचाई विभाग के एसडीओ दीपक कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग के द्वारा MICADA योजना लागू की गई है जिसमें ड्रिप इरीगेशन के जरिए किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यही है कि हरियाणा में जो पानी का संकट गहराता जा रहा है उस संकट से बाहर निकाला जा सके। हरियाणा में सिंचाई विभाग की ओर से सूक्ष्म सिंचाई विधि पर काफी जोर दिया जा रहा है ताकि किसान इसको अपनाये। इसमें किसान के खेत में एक बड़ा कंक्रीट का तालाब बनाया जाता है जहां पर किसान वर्षा या नहर का पानी इकट्ठा कर सकता है और सोलर पैनल के जरिए अपने ट्यूबवेल को चला कर यहां से वह अपने खेत में पानी दे सकता हैं। ट्यूबवेल के जरिए सूक्ष्म सिंचाई विधि में पाइपों के जरिए फवारा विधि से किसान अपने खेत में पानी से सिंचाई कर सकता हैं।
सूक्ष्म सिंचाई विधि से 42 फ़ीसदी पानी की होती है बचत
उन्होंने बताया कि अगर किसान सूक्ष्म सिंचाई विधि से खेत में पानी की सिंचाई करता है तो उसमें किसान 42 फ़ीसदी तक पानी की बचत कर सकता है जिसे आने वाले समय में पानी की समस्या से निपटा जा सकता है क्योंकि अगर किसान सीधा अपनी अपने खेत में लगाते हैं तो उसे पानी का दोहन ज्यादा होता है,लेकिन इस विधि के जरिए पौधे को उतना ही पानी दिया जाता है जितने उसकी आवश्यकता होती हैं। ऐसे में किसान इस योजना का लाभ लेकर करीब 42 पानी की भी बचत कर सकते है। किसान सूक्ष्म सिंचाई विधि से खेती कर रहा है इसकी पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है हालांकि सिंचाई विभाग और कृषि विभाग की ओर से सूक्ष्म सिंचाई विधि से 11 फीसदी तक पैदावार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है लेकिन यह बढ़ोतरी 20 फ़ीसदी तक भी हो जाती है क्योंकि यह अलग-अलग फसलों के आधार पर ही उत्पादन की गणना की जाती है और जिसमें किसान अपनी हर प्रकार की फसल में उत्पादन में भी बढ़ोतरी इस विधि के जरिए कर सकते हैं.
हरियाणा में धान की बड़े स्तर पर खेती की जाती है जिसके चलते एक हेक्टेयर धान की खेती करने पर 15 लाख लीटर के करीब पानी खर्च किया जाता है. ऐसे में पानी का दोहन ज्यादा होता है तो ड्रिप इरिगेशन विधि का प्रयोग करके किसान 40% तक पानी की बचत कर सकते हैं और धान की खेती भी हरियाणा में आसानी से कर सकते हैं। सिंचाई विभाग कृषि विभाग के साथ मिलकर इस योजना को हरियाणा के एक-एक किसान तक पहुंचाने का काम कर रहा है ताकि किसान इस विधि का प्रयोग करके पानी की भी बचत करें और अपने फसल की पैदावार में भी बढ़ोतरी करें।







