सोनीपत (एकता): जीवन में कुछ बड़ा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है और संघर्ष करने के लिए हौसले का होना जरूरी है। अगर मन में हौसला होगा तो आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। ऐसा ही कारनामा हरियाणा की बेटी मंजू ने कर दिखाया। मीडिया सूत्रों के अनुसार मंजू के जुनून और मेहनत की शुरुआत एक फिल्म से हुई।

बता दें कि साल 2007 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘चक दे इंडिया’ देख सोनीपत के ब्रह्म नगर की रहने वाली मंजू ने अपने सपने को साकार करने की सोची। उसका बचपन से ही हॉकी खिलाड़ी बनने का था। आखिरकार मंजू की मेहनत रंग लाई। अब वह भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम की मेन प्लेयर हैं। अब भारतीय हॉकी टीम को वर्ल्ड कप दिलाना मंजू का जुनून बन गया है।
कहते हैं कि हर इंसान की कामयाबी के पीछे किसी न किसी का होथ तो जरूर होता है। बस मंजू की मेहनत के पीछे उसके पिता का हाथ था। उसका पिता मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाता था। उसने जैसे-तैसे बेटी की प्रैक्टिस और अन्य खर्च के लिए पैसे पूरे किए। बेटी को हॉकी प्रैक्टिस के लिए भेजा। मंजू को कोच अक्सर उसे आर्थिक रूप से सहायता की।
रेलवे में भी मंजू ने की थी नौकरी
बता दें कि 2 साल पहले मंजू से उत्तर रेलवे में नौकरी भी की। भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी मंजू ने आज जो मुकाम हासिल किया है, उसके बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। हर कोई उसकी तारीफ कर रहा है। आज मंजू को पूरा देश जानता है। उसे एक नई पहचान मिली है।







