करनाल (अंकुर कपूर): जहां बसंत पंचमी पर्व के अवसर पर युवा पतंगबाजी कर अपना मनोरंजन करते हैं वहीं पतंगबाजी के लिए बरती जा रही प्रतिबंधित चाइना डोर पक्षियों का दम घोट रही हैं। जानलेवा चाइनीज डोर बेजुबान पक्षियों की जान के लिए आफत बन गई हैं। युवाओं ने जहां बसंत पंचमी पर खूब पतंगबाजी की, वहीं राहगीर पतंग डोर की चपेट में आने से घायल हुए और परिदों पर भी इसका घातक प्रहार हुआ है। करनाल का सदर बाजार जिले में पतंग डोर का हब है।
प्रशासन के प्रतिबंध के दावों की खुली पोल
यह डोर कोई घर में तो बनती नहीं हैं, यह डोर बाजार से ही घरों तक पहुंची है। जो प्रशासन के प्रतिबंध के दावों की पोल खोल रहा है। चाइनीज डोर में उलझकर दर्जनों पंछी घायल हो गए, जिनमें कईयों की टांग कट गई तो कईयों के पंख। जिला प्रशासन चाइनीज डोर की बिक्री पर रोक नहीं लगा पा रहा है। कागजी प्रतिबंध लगाकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली जाती है। जैन समाज से साध्वी अर्चिता ने बताया कि समाज द्वारा 21 वर्ष पहले करनाल के सेक्टर 6 में जीवो मंगल के नाम से एक ऐसा संस्थान बनाया गया है, जहां पर घायल पक्षियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाता है।
संस्थान में 2002 से निशुल्क सेवाएं दे रहे डॉ शमशेर सिंह चौधरी ने बताया कि बसंत पंचमी के अवसर पर बहुत से पर कट्टे पक्षी घायल अवस्था में लोग यहां लेकर आते हैं। जिनका इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि संस्थान में लगभग 400 से 500 पक्षी रहते है, इनमें ज्यादा कबूतर हैं। यहां पर पक्षियों की गिनती तो नहीं की जा सकती, क्योंकि 40 से 50 के करीब पक्षी चले जाते हैं और नए और आ जाते हैं। घायल अवस्था में इलाज के लिए आए गीतिका व दिलबाग ने बताया कि अगर सरकार चाइनीज डोर को सख्ती से बैन कर तो ही हम पक्षियों को बचा सकते हैं। जो डोर इंसानो के लिए घातक है तो भला इसकी चुंगल में फंस कर भला पक्षी कैसे बचेंगें।







