अंबाला (अंकुर कपूर): पूरे उत्तर भारत में लगातार पड़ रहे घने कोहरे व कड़ाके की ठंड किसानों के चेहरे पर खुशी लेकर आई है। इस ठंड ने फसलों की रिक्वायरमेंट को पूरा कर दिया है लेकिन मकर सक्रांति के बाद तापमान में बढ़ोतरी होने से गेहूं की फसल में बीमारी लगने का खतरा बढ़ जाता है जो किसानों की चिंता को बढ़ा देता है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वो 20 फरवरी सावधान रहें और अपनी फसल को हर रोज चेक करते रहें। अगर ऐसे कोई लक्षण उन्हें नजर आएं तो वो कृषि विभाग से सलाह लेकर स्प्रे करें। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
हल्की बारिश होने से किसानों की फसल को काफी फायदा मिला। लेकिन किसानों के लिए अब एक बार फिर कृषि विभाग ने सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि यहां येलो रस की बीमारी हर साल आती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमने अपने फील्ड स्टाफ को विभिन्न व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से जिसमे हमने अध्यापकों का भी एक ग्रुप बनाया हुआ है और बच्चों को भी बताया जाता है। इसके लिए हम किसानों को भी कैंप लगाकर जागरूक करते हैं।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की तरफ से पूरी तैयारी की गई है, अगर बीमारी का प्रकोप होगा भी तो नाममात्र का होगा। 10 दिन के बाद रिपोर्ट आएगी फिर पता चल पाएगा और जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा वैसे-वैसे इस बीमारी की सम्भावना बढ़ जाती है। किसानों को भी सलाह दी जाती है कि वो अपने खेतों में जाकर निरंतर अपनी गेंहू की फसल को हाथ लगाकर चेक करते रहे। अगर उनके हाथों में पीले रंग का पाउडर लगता है तो फिर वो अपनी फसल पर स्प्रे जरूर करें ताकि येलो रस बीमारी से फसलों को बचाया जा सके।







