रोहतक (अंकुर कपूर): रोहतक में हुए करौंथा कांड पर करीब 16 साल बाद फैसला आया। 2006 में रोहतक करौंथा आश्रम में हुई हिंसा के आरोपी संत रामपाल समेत 23 लोगों को जिला अदालत ने बरी कर दिया है। जबकि तीन आरोपी कृष्णकांत, सुनील व देवेंद्र को आर्म्ज एक्ट में दो-दो साल की सजा सुनाई गई है और पांच ₹5000 जुर्माना लगाया है।
बता दें कि रामपाल पर करौंथा आश्रम में हुई हिंसा के मामले में 302, 307, 323 समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था। रामपाल के वकील जय प्रकाश गख्खड़ ने बताया कि रोहतक एडिशनल सेशन जज राकेश कुमार की अदालत ने सबूत के अभाव में संत रामपाल को रिहा किया है। 12 जुलाई 2006 में आश्रम में हिंसा हुई थी जिसमें 64 लोगों को चोटें आई थी और एक की मौत हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां पर पंचायत इकट्ठी हुई है और बड़ी हिंसा हो सकती है जिसके बाद करीब 4 से 5 हजार पुलिसकर्मी और पुलिस के जवान करोथा आश्रम में पहुंचे थे और वहां पर हिंसा हुई थी।
जयप्रकाश गख्खड़ ने कहा कि जिस व्यक्ति की मौत हुई थी उसमें पुलिस यह साबित नहीं कर पाई आश्रम में मिले हथियारों से एक व्यक्ति की मौत हुई है। वही सबूत न मिलने के चलते भी एडीशनल सेशन जज राकेश कुमार ने रामपाल समेत 23 लोगों को बरी कर दिया है। गौरतलब है कि रामपाल के बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट ने गांव करौंथा में सतलोक आश्रम खोला था। इसका आर्य समाजियों तथा आसपास के ग्रामीणों ने विरोध किया। वहीं रामपाल के अनुयायियों व आर्य समाजियों में टकराव हो गया।







