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48 घंटे के बाद PGI में इमरजेंसी सेवाएं हो सकती है बंद, भूख हड़ताल पर बैठे MBBS छात्र

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रोहतक (अंकुर कपूर): पंडित भगवत दयाल शर्मा मेडिकल साइंस के छात्रों की हड़ताल का आज 24 वां दिन है। एमबीबीएस छात्र लगातर बोंड पॉलिसी के खिलाफ धरना दिए हुए हैं। धरना 1 नंबर से शुरू हुआ था, जो अब और भी उग्र रूप ले चुका है। बांड पॉलिसी के विरोध में जहां पहले MBBS छात्र- छात्राएं ही धरने पर बैठे थी। वहीं 4 दिन की आंशिक पेन डाउन हड़ताल के बाद वीरवार को RDA यानि की रेजिडेंशियल डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी एमबीबीएस छात्रों को पूर्ण रूप से समर्थन दे दिया है।

RDA के अध्यक्ष डॉ अंकित का कहना है कि सरकार जबतक बांड पोलसी को वापिस नहीं लेती या बच्चों को ये आश्वासन नहीं दिया जाता। उन्हें सरकारी नौकरी दी जाएगी ये हड़ताल यूं ही जारी रहेगी। सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा  या तो सरकार छात्रों की बात माने या फिर 48 घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं भी बाधित कर दी जाएंगी। वहीं धरने पर बैठे MBBS छात्रों ने सरकार का ध्यान अपनी और खींचने के लिए अब भूख-हड़ताल शुरू कर दी है।

रोहतक पीजीआई की चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी के बहार 10 एमबीबीएस छात्र 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठ गए है। छात्रों का कहना है कि सरकार उन पर बोंड पॉलिसी थोप रही है और अब अस्पताल प्रशासन उन्हें ओपीडी में जाने से रोक रहा है। पीजीआई के इन छात्रों को रोहतक के  सभी मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का भी समर्थन मिल गया है। जिससे छात्रों का ये आंदोलन अब और अधिक मजबूत होता दिख रहा है। एमबीबीएस डॉक्टर्स की इस हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। ओपीडी में डॉक्टर न होने के कारण यहां आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

करनाल से आए एक मरीज के परिजन की माने तो उन्हें कल्पना चावला अस्पताल से रोहतक पीजीआईएमएस के लिए 15 तारिख को रेफर किया गया था लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते उनके मरीज को अब तक दाखिला नहीं मिल पाया है। जिसके कारण वह काफी परेशान है। वही रोहतक पीजीआई में प्रतिदिन 5 से 6 हजार के करीब ओपीडी होती है, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थान में आए मरीजों का बुरा हाल दिखाई दे रहा है। मरीज प्राइवेट हॉस्पिटलों में जाने पर मजबूर हो गए हैं। सरकार से मांग कर रहे हैं कि डॉ व सरकार के बीच की लड़ाई मैं मरीज पीस रहे हैं। सरकार इस समस्या का जल्द समाधान निकाले ताकि उनके मरीज का इलाज हो सके।

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