भिवानी (अकुंर कपूर): ऑनलाइन शॉपिंग सिस्टम से रेहड़ी चालकों की दुकानदारी खत्म होती जा रही है। एक छोटी सी चीज को भी लोग ऑनलाइन ऑर्डर कर मंगा लेते हैं। हालात यह है कि दुकान का खर्चा निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है। बाजार की दुकानें सामानों से सजी हुई हैं, लेकिन दुकानदारों को ग्राहको का इंतजार है। बदलते समय में चकाचौंध भरे जीवन से व्यक्ति की खरीदारी की प्रवृत्ति में बड़ा बदलाव किया है। इस दीपावली पर बदलाव का असर साफ नजर आ रहा है। जहां पहले रेहड़ी-पटरी वालों से दीपावली का सामान खरीदकर आमजन अपनी व दुकानदारों की दीपावली मनवाते थे, आज उसका स्थान बड़े-बड़े शोरूम व ऑनलाइन शॉपिंग ने ले लिया है। जिसके चलते जमीन पर सामान रखकर बेचने वाले दुकानदारों के लिए दीपावली मनाना बड़ी खुशियों में शामिल नहीं रहा है।

लोगों द्वारा की जाने वाली खरीदारी की प्रवृत्ति में परिवर्तन के कारणों को जाने तो सबकी अपनी-अपनी दलीलें है। बड़ी दुकानों के दुकानदार दीपक तौला, महेंद्र कहते है कि बड़े शोरूम व ऑनलाईन माध्यम से जो वैरायटी व सामान की विविधता ग्राहक को संतुष्टि देती है, वह संतुष्टि रेहड़ी, पटरी के सामान में ग्राहकों को नहीं मिलती। अब तो जिनकी जेबें भी कमजोर है, वे भी ऑनलाइन माध्यम व बड़ी दुकानों की तरफ खरीदारी का रूख करने लगे हैं, जिसके चलते रेहड़ी, पटरी वाले दुकानदारों के लिए दीपावली खुशी में परिवर्तित होती नजर नहीं आ रही।

रेहड़ी, पटरी लगाकर दीपावली का सामान बेचने का प्रयास कर रहे भिवानी के मुकेश, नौरंगी, ओमप्रकाश बताते है कि वे कड़ी मेहनत से दीपावली के लिए मिट्टी के दीए व मिट्टी से बनने वाले अन्य सजावटी सामान को तैयार करते हैं। विभिन्न प्रकार के रंग व पेंट का प्रयोग कर इन मिट्टी के बर्तनों को सजाते है, परन्तु बहुत कम ग्राहक उनके द्वारा बनाए गए परंपरागत सामान को खरीदने के लिए पहुंचते है। जो पहुंचते है, वे ग्राहक महंगा बताकर चकाचौंध भरी रेडीमेड लडियों, झालरों, कैंडल को खरीदना पसंद करते है तथा उनके सामान के खरीदार भी नहीं मिलते। ग्राहकों के मन में आए बदलाव की बात करें तो चकाचौंध भरी दुकानों से सामान खरीदने वाले ग्राहक जहां बदलाव पर बात करने से गुरेज करते है, वही कुछ ऐसे ग्राहक भी है, जो रेहड़ी, पटरी वाले परंपरागत सामान को तवज्जो देते है।







