कुरुक्षेत्र: हरियाणा न सिर्फ अपने सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि इस राज्य का धार्मिक महत्व भी उतना ही है। हरियाणा में प्राचीन काल के कई मंदिर हैं। भारतीय संस्कृति और विरासत को संभाले ये मंदिर देशभर में प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार हुआ था। यह मंदिर कर्मभूमि कुरुक्षेत्र में स्थित है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कुरुक्षेत्र में प्रमुख त्योहार के रूप में उल्लास से मनाती है। श्रीकृष्ण का कुरुक्षेत्र से गहरा नाता रहा है। इसके बाद भी कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण से जुड़े प्राचीन व ऐतिहासिक मंदिर या तीर्थ नहीं है। जन्मभूमि मथुरा में जहां श्रीकृष्ण से जुड़े दर्जनों में मंदिर हैं, लेकिन कर्मभूमि कुरुक्षेत्र में आधुनिक काल में ही अधिकांश कृष्ण मंदिर बने।

कुरुक्षेत्र में भी हुआ था राधा से कृष्ण का मिलन
कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र स्थित शक्तिपीठ भद्रकाली मंदिर में ही करीब 6 साल की उम्र में श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार हुआ था। कई शास्त्रों में उनके चार बार कुरुक्षेत्र आने का वर्णन है। पहली बार मुंडन संस्कार के लिए कृष्ण यहां आए तब उनका राधा के साथ मिलन भी यहां हुआ था। जहां श्रीकृष्ण व राधा गोपियों के साथ रास करते थे।

5500 साल पुराना वटवृक्ष
कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र के देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ में एक वटवृक्ष वृक्ष है। यह वटवृक्ष आज भी यहां मौजूद है, जो 5500 साल पुराना है। इसकी काफी मान्यता है। भगवान कृष्ण और उनके भाई बलराम का मुंडन संस्कार हुआ था। इसी कारण से लोग अपने बच्चे का मुंडन कराने के लिए दूरदराज के क्षेत्र से इस मंदिर में आते है।








