करनाल: खेलों में अपना करियर बनाने की चाहत रखने वालों की पहली पसंद हरियाणा है। हरियाणा सरकार खेलों के प्रति लोगों में जागरूकता फैला रही है। खिलाड़ियों को जितनी सुविधाएं हरियाणा सरकार दे रही है उतनी किसी और राज्य में नहीं दी जाती। इसके साथ ही खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि भी अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक दी जाती है। हरियाणा अब उन लोगों की पहली पसंद है जो खेलों में अपना करियर बनाना चाहते हैं। बर्मिंघम में 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में देश के खिलाड़ियों ने अपना शानदार प्रदर्शन बरकरार रखते हुए देश को कुल 61 पदक दिए हैं जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल हैं।
देश की आबादी में लगभग दो प्रतिशत भागीदार हरियाणा ने इन खेलों में अपना दबदबा कायम रखा है। भारतीय दल में इस बार सबसे ज्यादा 43 खिलाड़ी हरियाणा से हैं, जिनमें से 17 खिलाड़ियों ने मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के धाकड़ खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हरियाणा के पहलवानों का डंका पूरे विश्व में बजता है। हरियाणा सरकार की खेल नीति का ही परिणाम है कि राष्ट्रमंडल खेलों में खिलाड़ियों ने धड़ाधड़ गोल्ड मेडल जीते।
करनाल के सत्यबीर सिंह सीनियर कोच ने बताया कि हरियाणा सरकार की उच्चतम करियर खेलनीति के कारण कॉमनवेल्थ में हरियाणा के शीर्ष पर होने व ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के गोल्ड जीत के आने के बाद कर्ण स्टेडियम में खिलाड़ियों की बहार आ गई है। स्टेडियम में सैंकड़ो बच्चे प्रतिदिन अभ्यास करते हैं। उन्होंने बताया आनेवाले समय मे हरियाणा पूरे विश्व पटल पर जबरदस्त छायने वाला है।
खेल स्टेडियम में प्रेक्टिस करने आये खिलाड़ियों ने बताया कॉमनवेल्थ गेम्स में इस बार हरियाणा के खिलाड़ियों के दमखम से हम बहुत ही प्रभावित हुए है। वो हमारे प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने बताया कि हम अपना करियर अपनी गेम्स में बनाना चाहते है जिसके लिए हम प्रैक्टिस के लिए यहां स्टेडियम पहुंचते है। उन्होंने खट्टर सरकार की खेलनीति की भी सराहना की।







