अंकुर कपूर,अंबाला। अंबाला कैंट की अनाज मंडी में धान की आवक बढ़ने के साथ किसानों को पोर्टल संबंधी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि गेट पास का सत्यापन नहीं होने के कारण उन्हें मंडी में इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, धान का उठान धीमा होने से मंडी में फसल रखने के लिए जगह की कमी भी सामने आ रही है।
किसानों के अनुसार, कई किसान अपनी धान की फसल लेकर कई दिनों से मंडी में मौजूद हैं, लेकिन अभी तक उनकी फसल की खरीद नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने में पहले ही देरी हुई और अब पोर्टल पर गेट पास सत्यापित नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। किसानों को चिंता है कि मंडी में धान की जगह खाली नहीं होने के कारण उन्हें अपनी अगली फसल आलू और तोड़िया की बुआई में भी देरी हो सकती है।
किसानों ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में खुले में पड़ी धान की फसल के भीगने और खराब होने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से धान की खरीद और उठान में तेजी लाने की मांग की है, ताकि मंडी में फसल रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सके।
वहीं, अंबाला कैंट के मंडी सचिव नीरज भारद्वाज ने बताया कि अब तक मंडी में 1,797 गेट पास जारी किए जा चुके हैं। मंडी में करीब 1.50 लाख क्विंटल धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 47,700 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक 6,027 क्विंटल धान का उठान भी किया जा चुका है।
मंडी सचिव के अनुसार, किसानों को जल्द से जल्द मंडी से फ्री कराने के लिए कर्मचारी लगातार गेट पास जारी करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने गेट पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतार होने की बात से इनकार करते हुए कहा कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
गेट पास के सत्यापन में आ रही समस्या पर मंडी सचिव ने बताया कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल से ई-पोर्टल पर डाटा ट्रांसफर होने में एक-दो दिन का समय लग सकता है। उनके मुताबिक, अब यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी।
बारिश की संभावना को देखते हुए मंडी प्रशासन ने भी तैयारियां की हैं। मंडी सचिव ने बताया कि आढ़तियों के पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल और पॉलीथिन उपलब्ध हैं, ताकि धान को बारिश से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए पूरी व्यवस्था की जा रही है और लापरवाही मिलने पर संबंधित आढ़तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धान को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लेकर आएं। मंडी सचिव ने बताया कि सरकारी खरीद के लिए धान में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी की सीमा निर्धारित है।







