चंडीगढ़। हरियाणा में नगर निकाय और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बुधवार को हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में करीब तीन घंटे तक चली बातचीत भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल होने के बाद प्रदेशभर के 40 हजार से अधिक कर्मचारी आंदोलन पर उतर आए हैं, जिससे सफाई, सीवरेज, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
बैठक में राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल तथा कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। कर्मचारी संगठनों की ओर से हरियाणा नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री, हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, महासचिव गुलशन भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि नियमितीकरण समेत प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
सरकार ने कर्मचारियों को नियमित करने के मुद्दे पर अदालत से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए 30 सितंबर तक का समय मांगा, लेकिन यूनियनों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदेश के सभी 87 नगर निकायों में कार्यरत करीब 25 हजार सफाई कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। इनके साथ अन्य निकाय कर्मी भी कामकाज से दूर रहेंगे। कर्मचारी संगठनों ने लिपिकीय, सीवरेज और कार्यालयी कर्मचारियों से भी हड़ताल में शामिल होने की अपील की है। वहीं प्रदेश के 103 अग्निशमन केंद्रों पर तैनात लगभग 2100 दमकल कर्मचारी भी आंदोलन का हिस्सा बने हैं।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार पहले हुई बैठकों में बनी सहमति के बावजूद लिखित आदेश जारी नहीं कर रही है। उन्होंने सफाई और सीवरेज सेवाओं से जुड़े ठेकों को समाप्त करने की मांग भी दोहराई। यूनियन का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
हड़ताल के चलते नगर निकायों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सीवरेज और पेयजल आपूर्ति से जुड़े कार्यों में भी बाधा आने की आशंका है। इसके अलावा प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य प्रशासनिक सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। दमकल विभाग में आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन फायरमैन, चालक और परिचालकों के हड़ताल पर रहने से कई स्थानों पर अग्निशमन सेवाओं की गति प्रभावित हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी निकाय कर्मचारियों ने मई माह में आंदोलन किया था, जिसे सरकार के आश्वासन के बाद वापस ले लिया गया था। हालांकि मांगों का समाधान नहीं होने पर कर्मचारी एक बार फिर संघर्ष के रास्ते पर उतर आए हैं।







