अंकुर कपूर, अंबाला। अंबाला में हुई कुछ घंटों की बारिश ने नगर प्रशासन की तैयारियों और दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को हुई तेज बारिश के करीब 12 घंटे बाद भी शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर घरों में पानी घुसने से स्थानीय निवासियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश थमने के कई घंटे बाद भी जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दी। निचले इलाकों और कॉलोनियों में पानी जमा रहने से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ। कई परिवारों को घरों से बाहर निकलने और जरूरी कार्यों के लिए आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
निवासियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जलभराव की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन हाल के वर्षों में सड़क और नाले के निर्माण के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष कई बार मुद्दा उठाया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि नाले का जलस्तर कम होते ही कॉलोनियों में भरा पानी स्वतः निकल जाएगा, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने के बावजूद जलभराव की स्थिति जस की तस बनी रही। कई घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और अन्य वस्तुओं को भी नुकसान पहुंचा है।
इस मामले में अंबाला कैंट वार्ड-14 के पार्षद हीरा लाल ने भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बनाए गए नाके और सड़क का स्तर आसपास की नालियों से ऊंचा रखा गया है, जिसके कारण पानी की निकासी बाधित हो रही है। उनका दावा है कि इसी वजह से कई कॉलोनियों में एक से डेढ़ फीट तक पानी जमा रहा।
पार्षद ने बताया कि यह समस्या चार वार्डों के निवासियों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की हाउस बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया था और चेतावनी दी गई थी कि यदि सड़क निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया तो आसपास की 15 से 20 कॉलोनियां जलभराव की चपेट में आ सकती हैं। बावजूद इसके समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने प्रशासन पर जनहित की अनदेखी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि भविष्य में गलियों और सड़कों का स्तर और ऊंचा किया जाता है तो लोगों को अपने मकानों की ऊंचाई भी बढ़ानी पड़ेगी, जिस पर लाखों रुपये खर्च होंगे। यह हर परिवार के लिए संभव नहीं है।
फिलहाल क्षेत्र में जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर लोगों में रोष बना हुआ है। स्थानीय निवासी प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर बारिश के बाद उन्हें ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।







