चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से अधिकारियों के विदेश दौरों पर सितंबर 2026 तक रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार इस अवधि में किसी भी अधिकारी को सामान्य परिस्थितियों में विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल चिकित्सीय आपात स्थिति के मामलों में ही विशेष अनुमति दी जा सकेगी। सूत्रों के अनुसार यदि वित्तीय परिस्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो इस प्रतिबंध की अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है।
राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया था। हालांकि अब इस बजट में बड़ी कटौती करने की तैयारी चल रही है और सरकार इसे आधा या उससे भी कम करने पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वित्त वर्ष में विदेश यात्राओं के लिए केवल ढाई करोड़ रुपये का प्रावधान था, जबकि इस बार बजट में लगभग 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।
वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार मुख्य सचिवालय के लिए विदेश यात्राओं पर 4 करोड़ रुपये, सिंचाई विभाग के लिए ढाई करोड़ रुपये और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के लिए 30 लाख रुपये का बजट रखा गया था। इसके अलावा कृषि, पशुपालन, सहकारिता तथा अन्य विभागों के लिए भी अलग-अलग राशि निर्धारित की गई थी। हालांकि अब सरकार बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए इन प्रावधानों की समीक्षा कर रही है।
सरकार ने केवल विदेशी दौरों पर ही नहीं बल्कि वाहनों और ईंधन पर होने वाले खर्च को भी कम करने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग के अनुसार मंत्रियों की गाड़ियों के ईंधन के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये और अधिकारियों के वाहनों के लिए 4 करोड़ 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था। अब सभी विभागों को सितंबर 2026 तक पेट्रोलियम संबंधी खर्चों में 20 प्रतिशत की कमी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही प्रत्येक विभाग को हर महीने वाहन उपयोग में कम से कम 10 प्रतिशत कमी का विवरण सरकार को देना होगा। खर्चों की निगरानी और बचत के आकलन के लिए राज्य सरकार एक विशेष डिजिटल पोर्टल विकसित करने की तैयारी भी कर रही है, जिसके माध्यम से विभागवार अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने पिछले वर्ष अधिकारियों और कर्मचारियों की विदेश यात्राओं को लेकर नई नीति लागू की थी। इसके तहत किसी अधिकारी को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम एक सरकारी और एक निजी विदेश यात्रा की अनुमति दी जाती है। वहीं निजी खर्च पर विदेश जाने वाले अधिकारियों के लिए भी एक वित्तीय वर्ष में केवल एक यात्रा की सीमा निर्धारित की गई है।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगेगा, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। वित्तीय अनुशासन की दिशा में इसे राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







