चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की नई औद्योगिक नीति में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। अब यदि किसी स्वीकृत सब्सिडी, प्रोत्साहन राशि, सरकारी अनुदान या अन्य भुगतान में देरी होती है, तो उद्योग विभाग संबंधित उद्यमियों को बकाया राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देगा। यह प्रावधान पहली बार लागू किया जा रहा है, जिससे भुगतान प्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सके।
इसके साथ ही राज्य सरकार छोटे कारोबारियों और एमएसएमई इकाइयों के लिए “स्मॉल ट्रेडर्स एंड एमएसएमई इंश्योरेंस स्कीम” शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत आग, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर किफायती बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे व्यापारी बड़े आर्थिक जोखिमों से बच सकेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार उद्यमियों को ‘इनवेस्ट हरियाणा’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। प्रारंभिक जांच के बाद पात्र आवेदकों को स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा सात कार्य दिवसों के भीतर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद विस्तृत जांच पूरी होने पर शेष 50 प्रतिशत राशि 45 कार्य दिवसों में दी जाएगी। यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होता, तो देरी के प्रत्येक दिन के हिसाब से ब्याज स्वतः जुड़ता रहेगा।
अब तक उद्योगों को सब्सिडी और प्रोत्साहन तो मिलते थे, लेकिन भुगतान में देरी होने पर ब्याज देने या तय समय में निपटान की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। नई नीति के तहत समयबद्ध भुगतान, अग्रिम राशि जारी करने और देरी पर ब्याज देने की स्पष्ट प्रणाली लागू की जा रही है।
प्रदेश में पहले से ‘मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना’ और ‘व्यापारी क्षतिपूर्ति बीमा योजना’ लागू हैं, जो मुख्य रूप से दुर्घटना या सीमित नुकसान को कवर करती हैं। नई इंश्योरेंस स्कीम इनसे अधिक व्यापक होगी और व्यापारिक संपत्ति व स्टॉक को भी सुरक्षा प्रदान करेगी।
हरियाणा में एमएसएमई क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच करीब 33 हजार इकाइयां दर्ज थीं, जबकि औद्योगिक रोजगार 2018-19 में 10.16 लाख से बढ़कर 2023-24 में 11.91 लाख तक पहुंच गया है। देश के एमएसएमई इकोसिस्टम में राज्य की हिस्सेदारी करीब 9-10 प्रतिशत आंकी जाती है।
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सचिव राज चावला का कहना है कि समयबद्ध भुगतान और बीमा सुरक्षा से निवेश का माहौल मजबूत होगा। इससे नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और छोटे व्यापारियों का भरोसा भी बढ़ेगा। उन्होंने इस फैसले को प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम बताया है।







