चंडीगढ़ | पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी क्षेत्रों में साफ दिखने लगा है। हरियाणा और पंजाब में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश में कहीं घना कोहरा और कोल्ड-डे की स्थिति बनी हुई है, तो कहीं तेज सर्द हवाओं और पाले ने परेशानी बढ़ा दी है। दिन और रात दोनों ही तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किए जा रहे हैं।
हरियाणा के 12 जिले इस समय शीतलहर की चपेट में हैं, जहां ठंड का स्तर जम्मू और धर्मशाला जैसे पहाड़ी शहरों से भी अधिक रिकॉर्ड किया गया है। नारनौल में 24 घंटे के भीतर दिन का तापमान गिरकर 6.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जींद और चरखी दादरी में दिन का अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। रात के तापमान की बात करें तो नारनौल में न्यूनतम 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि भिवानी में 5.5, सिरसा में 5.7 और गुरुग्राम में 5.9 डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम विभाग ने शीतलहर को लेकर बुधवार के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, शिक्षा, शहरी स्थानीय निकाय समेत सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि ठंड से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि वे पर्याप्त गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें। घर के भीतर कोयला या अंगीठी जलाने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे निकलने वाली गैस जानलेवा हो सकती है। शरीर में सुन्नता, उंगलियों, पैर की उंगलियों, कान या नाक के सिरे पर सफेद या पीला रंग दिखाई देने पर तुरंत सतर्क होने को कहा गया है।
फसलों पर पाले का खतरा
शीतलहर और पाले का असर फसलों पर भी पड़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार ठंड के कारण गेहूं और जौ में काला रतुआ, सरसों और सब्जियों में सफेद रतुआ तथा आलू-टमाटर में लेट ब्लाइट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को बोडो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराइड के छिड़काव की सलाह दी गई है। वहीं पशुपालकों से कहा गया है कि वे पशुओं के आवास को चारों ओर से ढककर ठंड से बचाव करें।







