फरीदाबाद | दिल्ली ब्लास्ट की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में छापेमारी कर एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ किया है। जांच में पता चला है कि इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ आतंकवादी संगठनों के संपर्क में थे और यूनिवर्सिटी की सुविधाओं का दुरुपयोग कर रहे थे।
डॉक्टरों के नेटवर्क से जुड़ा आतंक का धंधा
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि दिल्ली कार ब्लास्ट में शामिल कुछ आरोपी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं। इनमें से कुछ पूर्व छात्र और कर्मचारी हैं जो कट्टरपंथी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवातुल-हिंद के संपर्क में थे। एजेंसियों के अनुसार, ये डॉक्टर और स्टाफ यूनिवर्सिटी की लैब और मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने और आतंकियों को सहायता देने के लिए कर रहे थे।
दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा सुराग
जानकारी के मुताबिक, सोमवार रात करीब 6:52 बजे लाल किले के पास एक i20 कार में विस्फोट हुआ, जिससे कई वाहन जल गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। फॉरेंसिक जांच में कार के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी होने के प्रमाण मिले। जांच में सामने आया कि आरोपी डॉ. उमर नबी, जो यूनिवर्सिटी में कार्यरत था, धमाके से कुछ घंटे पहले ही इसी कार में फरीदाबाद से निकला था। उसे इस आतंकी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
फरीदाबाद में NIA की बड़ी छापेमारी
मंगलवार सुबह, NIA और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और आस-पास के इलाकों में एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर और 2,900 किलो विस्फोटक बरामद किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए फंड ट्रांसफर और आतंकी भर्ती का काम चल रहा था।
ऐसे उजागर हुआ ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’
इस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश तब हुआ जब श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर मिले थे। इसके बाद हुई कार्रवाई में डॉ. मुजम्मिल, अकील अहमद, इरफान और शाहीना नामक डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि “डॉक्टरों पर शक कम होता है, इसलिए हमें आतंकी गतिविधियों के लिए चुना गया।”
कंपनी और प्रशासन पर भी उठे सवाल
सायखा गांव के सरपंच जयवीर सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी बिना उचित अनुमति के कुछ गतिविधियां चला रही थी, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए।
जांच जारी, कई गिरफ्तारियां संभव
NIA, दिल्ली पुलिस और हरियाणा ATS की टीमें अब फतेहपुर तगा गांव और आस-पास के इलाकों में छापेमारी कर रही हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस मॉड्यूल को किस विदेशी हैंडलर से फंडिंग मिल रही थी और कितने डॉक्टर इसमें शामिल थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मॉड्यूल देश में अब तक का सबसे बड़ा ‘व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क’ हो सकता है — जहां डॉक्टरों और शिक्षाविदों ने अपनी पहचान का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया।







