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हरियाणा में झमाझम बारिश, कई जिलों में ओलावृष्टि अलर्ट जारी

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हरियाणा |  हरियाणा में सोमवार को कई जिलों में हुई बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई और जनजीवन प्रभावित हुआ। फतेहाबाद, हिसार, सिरसा, रोहतक, अंबाला, पंचकूला, पानीपत और गुरुग्राम सहित 16 जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। बारिश के चलते कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित रही और कुछ इलाकों में पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आईं।

मौसम विभाग ने मंगलवार को पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। बहादुरगढ़ में तेज हवा और वर्षा के कारण एक मकान पर पेड़ गिर गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

हिसार के हांसी और नारनौंद क्षेत्र में भी बारिश के साथ कई सड़कों पर पेड़ गिरे। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र और राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण हुआ है। सिरसा की दिशा से आए इस सिस्टम ने फतेहाबाद और हिसार में तेज वर्षा कराई।

इन मौसमी परिस्थितियों के चलते नमी युक्त हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रही हैं, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना बनी रहेगी। सिरसा जिले के जमाल गांव में हुई हल्की ओलावृष्टि से कपास की फसल को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मानसून के दौरान प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। 1 जून से 30 सितंबर तक हरियाणा में औसतन 426 मिलीमीटर वर्षा होती है, जबकि इस सीजन में औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

विभाग ने बताया कि 8 अक्टूबर से राज्य में तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
आज के लिए यलो अलर्ट पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, सोनीपत, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, फरीदाबाद और रोहतक में जारी किया गया है।
वहीं, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।

मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस सीजन में सबसे अधिक वर्षा यमुनानगर में 1116.9 मिलीमीटर दर्ज की गई। राज्य में अब तक सबसे अधिक मानसूनी वर्षा वर्ष 1988 में हुई थी, जब कुल 1108.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जबकि सबसे कम वर्षा 1918 में मात्र 196.2 मिलीमीटर रही थी।

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