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कैथल जिला परिषद बैठक में बड़ा फैसला: 6.35 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, पार्षदों में भ्रष्टाचार को लेकर तीखी बहस

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कैथल | करीब पांच महीने बाद हुई जिला परिषद हाउस बैठक में विकास और पारदर्शिता से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। एक ओर जहां परिषद ने 6.35 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी, वहीं दूसरी ओर दो पार्षदों के बीच रिश्वत और भ्रष्टाचार को लेकर जमकर नोकझोंक देखने को मिली।

पूर्व चेयरमैन व पार्षद दीपक मलिक ने जिला परिषद में रिश्वतखोरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मस्टररोल पास करवाने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की गई थी। वहीं, पार्षद दिलबाग उर्फ दीप बालू ने पलटवार करते हुए मलिक के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों में 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी के आरोप लगा दिए। हालांकि चेयरमैन कर्मबीर कौल ने स्थिति को संभालते हुए बैठक को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया और पारदर्शिता के लिए कई अहम निर्णय लिए।

पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: 7 निगरानी समितियों का गठन

बैठक में चेयरमैन कौल ने घोषणा की कि परिषद में पहली बार सात अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं, जो विकास योजनाओं और विभागीय कार्यों की निगरानी करेंगी। इन समितियों में पार्षदों को संयोजक व सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है।

गठित समितियां और उद्देश्य

  • बाल एवं महिला कल्याण समिति
  • किसान कल्याण व प्राकृतिक संसाधन समिति
  • सामाजिक व देश सेवा समिति
  • स्वास्थ्य व जनस्वास्थ्य समिति
  • खेल व युवा कल्याण समिति
  • शिक्षा व छात्र कल्याण समिति
  • भूमि वसूली समिति

इनका मकसद समस्याओं की पहचान, योजनाओं की निगरानी और समाधान के लिए रिपोर्ट तैयार करना है।

विकास कार्यों के लिए 6.35 करोड़ का बजट पास

बैठक में गली-नाली, चौपाल, जिम जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 6.35 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। चेयरमैन ने बताया कि अगले 15 दिनों में राज्य सरकार से 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मिलने की उम्मीद है।

गैरहाजिर अधिकारियों पर सख्ती

बैठक में रोडवेज, बिजली, कृषि, जन स्वास्थ्य, मार्केटिंग बोर्ड और शिक्षा विभाग के 6 अधिकारी अनुपस्थित रहे, जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

चेयरमैन का संदेश: हर गांव और व्यक्ति तक पहुंचे विकास

कौल ने कहा कि परिषद की भूमिका केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर गांव और हर नागरिक तक विकास कार्यों का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता है। हर शिकायत की जांच और हर कार्य की मॉनिटरिंग होगी ताकि जवाबदेही तय की जा सके।

 

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