चंडीगढ़ | हरियाणा पुलिस अब किसी भी शिकायत पर बिना एफआईआर दर्ज किए जांच नहीं कर सकेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बिना एफआईआर किसी भी प्रकार की पूछताछ या जांच कानूनन अवैध है।
हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि हरियाणा के विभिन्न जिलों, खासकर मोहाली समेत अन्य इलाकों में शिकायतों पर बार-बार जांच की जा रही थी, वह भी बिना एफआईआर दर्ज किए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 21 का खुला उल्लंघन है।
डीजीपी ने सौंपा हलफनामा, जांचें बंद
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने अदालत में हलफनामा दायर कर बताया कि राज्य में बिना एफआईआर दर्ज की गई सभी जांचें बंद कर दी गई हैं। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ऐसी प्रक्रिया दोहराई नहीं जाएगी।
न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस एनएस शेखावत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जांच करने वाले पुलिस अधिकारी न केवल दोषी हैं, बल्कि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों को हर्जाना देने के लिए भी उत्तरदायी होंगे। उन्होंने कहा कि यह अदालत की अवमानना मानी जाएगी और ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश केस में सुप्रीम कोर्ट के दिए निर्देशों की अवहेलना है।
कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा पुलिस हरकत में
कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा पुलिस ने विभागीय स्तर पर भी सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी जांच एफआईआर दर्ज किए बिना शुरू न की जाए। यह आदेश हरियाणा में पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इस फैसले से आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पहले बिना एफआईआर ही थानों में बुलाकर पूछताछ की जाती थी। अब पुलिस को हर शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई करनी होगी।







