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हरियाणा में इको ग्रीन प्रोजेक्ट फेल, कचरे से बिजली बनाने का सपना टूटा

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हरियाणा  | हरियाणा से बड़ी खबर आई है कि 2017 में कचरे से बिजली बनाने के लिए शुरू किए गए इको ग्रीन प्रोजेक्ट को सरकार ने असफल घोषित कर दिया है। इको ग्रीन कंपनी को औद्योगिक क्षेत्र में कचरे से बिजली बनाने का टेंडर मिला था, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी कंपनी प्लांट नहीं लगा सकी। इसी वजह से फरवरी 2024 में सरकार ने इसका अनुबंध रद्द कर दिया।

बंधवाड़ी में इको ग्रीन द्वारा जमा किया गया कूड़ा गुरुग्राम और फरीदाबाद नगर निगम के लिए परेशानी बन गया था, जिसके कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी सरकार को कड़ी चेतावनी दी थी। अब सरकार ने नगर निगम को नया प्रस्ताव तैयार करने के आदेश दिए हैं।

नगर निगम ने 800 करोड़ रुपये की लागत से सात साल का अनुबंध देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें बिजली उत्पादन का कोई जिक्र नहीं है, बल्कि केवल कचरे से खाद बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के बाद टेंडर जारी किया जाएगा।

खाद उत्पादन और कचरा प्रबंधन की योजना

नगर निगम वर्तमान में प्रतापगढ़ और मुजेड़ी में दो प्लांट संचालित कर खाद उत्पादन कर रहा है। प्रतापगढ़ प्लांट में रोजाना 350 टन कचरा निस्तारण की योजना थी, लेकिन लोगों के विरोध के कारण अब मात्र 200 टन कचरा ही निस्तारित हो पा रहा है। मुजेड़ी प्लांट में भी रोजाना 100 से 150 टन कचरा निपटाया जा रहा है।

नगर निगम इस बार जिस कंपनी को ठेका देगा, वह घर-घर से और कूड़ा गड्ढों से एकत्र कर डिस्पोजल प्लांट तक पहुंचाएगी। इसके बाद खाद या चारकोल बनाने का काम नगर निगम की जिम्मेदारी होगी। कंपनी को इसके लिए मासिक शुल्क भी दिया जाएगा, जिसे निगम संपत्ति कर के साथ कचरा शुल्क के रूप में वसूल करेगा।

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