भिवानी | भिवानी जिले में कार्यरत एक जे.बी.टी. शिक्षक आनंद घणघस ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर नौकरी के बदले पैसे लेने और भ्रष्टाचार उजागर करने के बाद 12 वर्षों तक मानसिक और प्रशासनिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अब सेवा में बहाली के बाद आनंद ने पूर्व सी.पी.एस. सहित 140 लोगों को 76 करोड़ रुपये की मानहानि के नोटिस थमा दिए हैं।
रविवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में आनंद घणघस ने बताया कि वे पात्र अध्यापक संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2011 में कांग्रेस शासनकाल में निकली जे.बी.टी. भर्तियों में उन्हें यह एहसास हुआ कि बिना पैसे दिए नौकरी संभव नहीं है। इस पर उन्होंने एक तत्कालीन विधायक और पूर्व सी.पी.एस. से संपर्क किया, जिन्होंने उनसे कथित रूप से 5 लाख रुपये लिए और यमुनानगर में नियुक्ति करवाई।
आनंद ने दावा किया कि अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान उन्होंने इस भ्रष्टाचार को उजागर किया, जिसके बाद उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करवा दिए गए। नतीजतन वे 9 साल तक सेवा से बर्खास्त और 32 महीने निलंबित रहे। हालांकि, 11 मार्च 2023 को शिक्षा विभाग ने उन्हें पुनः सेवा में बहाल कर दिया।
शिक्षक आनंद घणघस का कहना है कि उन्होंने जिन 140 लोगों को मानहानि नोटिस भेजे हैं, उनमें पूर्व विधायक, कांग्रेस के नेता, शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और उस समय के पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं जिन्होंने उनके खिलाफ झूठे हलफनामे दिए थे। उनका कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सिस्टम या संविधान का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष को झूठे मामलों में न फंसाए।







