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हरियाणा में जल संकट पर दिग्विजय चौटाला का हमला: भाजपा और आप की ‘दोहरी राजनीति’ को ठहराया जिम्मेदार

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चंडीगढ़ | उत्तर हरियाणा में गहराते जल संकट को लेकर जेजेपी के प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला ने राज्य सरकार की लापरवाही और आम आदमी पार्टी (AAP) की कथित मौन भूमिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जहां पंजाब में भाजपा नेता खुले तौर पर हरियाणा को पानी देने का विरोध कर रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी की हरियाणा इकाई विवाद पर चुप्पी साधे बैठी है।

दो नावों की सवारी कर रही भाजपा-आप की पोल खुल गई”

दिग्विजय चौटाला ने आरोप लगाया कि भाजपा और आम आदमी पार्टी दोहरी राजनीति कर रही हैं, जिसका खामियाजा हरियाणा की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर हरियाणा पानी की किल्लत से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर पंजाब में भाजपा नेता वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं और आम आदमी पार्टी के नेता पंजाब के पक्ष में एकतरफा समर्थन दे रहे हैं।

बीबीएमबी में हरियाणा का प्रतिनिधित्व कमजोर—चौटाला

चौटाला ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में हरियाणा की कमजोर मौजूदगी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों से हरियाणा के हिस्से की मेंबर इरिगेशन की पोस्ट खाली पड़ी है और हाल ही में सचिव पद पर भी हरियाणा के अधिकारी की जगह राजस्थान के अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है, जबकि यह पद लंबे समय से हरियाणा के पास था।

केंद्र सरकार को बताई कार्रवाई की जरूरत

उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हो तो पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू कर जल स्रोतों का नियंत्रण अपने हाथ में लिया जाए ताकि हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल सके।

केजरीवाल पर भी साधा निशाना

चौटाला ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद को हरियाणा का बेटा कहते हैं, लेकिन आज उनकी पार्टी की पंजाब सरकार हरियाणा के लोगों को प्यासा मरने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के पैतृक शहर सिवानी मंडी सहित उत्तर हरियाणा के कई जिले जल संकट से जूझ रहे हैं।

AAP के हरियाणा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

जेजेपी नेता ने आम आदमी पार्टी के हरियाणा नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे आज तक हरियाणा के हितों के लिए एक शब्द भी नहीं बोल पाए हैं। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत हरियाणा को उसका हिस्सा का पानी छोड़े और इस संकट को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय जनहित में समाधान की दिशा में कदम उठाए।

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