Sirsa, 22 April-सियाचीन ग्लेशियर की भीषण ठंड में देश की सेवा करते हुए सिरसा के गांव झोंपड़ा निवासी सूबेदार बलदेव सिंह शहीद हो गए। वे पिछले एक वर्ष से लद्दाख में तैनात थे। उनके शहीद होने की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
ऑक्सीजन की कमी के कारण बिगड़ी तबीयत
सूबेदार बलदेव सिंह ने अपने सैन्य करियर की शुरुआत जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स से की थी और पिछले वर्ष पदोन्नति पाकर सूबेदार बनते ही सियाचीन की कठिन पोस्टिंग पर तैनात किए गए थे। -35 डिग्री सेल्सियस तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।शहीद की पार्थिव देह को सोमवार सुबह वायुमार्ग से लद्दाख से दिल्ली लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के ज़रिए सिरसा स्थित उनके मीरपुर आवास पहुंचाया गया। वहां पहले से मौजूद सैकड़ों ग्रामीण, रिश्तेदार व परिचितों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। “बलदेव सिंह अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों से माहौल गूंज उठा।बाद में झोंपड़ा गांव की शिवपुरी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर भारतीय सेना के अधिकारियों, जवानों और सिरसा प्रशासन के प्रतिनिधियों ने उन्हें सलामी दी। एसडीएम राजेन्द्र कुमार और तहसीलदार भुवनेश ने पुष्पगुच्छ अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
परिवार के अन्य सदस्य भी सेना में विभिन्न पदों पर
बता दें कि बलदेव सिंह के पिता बलवंत सिंह पहले ही स्वर्ग सिधार चुके हैं। उनके परिवार में अब उनकी मां रचना कौर, बड़े भाई हरदेव सिंह, पत्नी गुरविन्द्र कौर, पुत्र उपराज सिंह और पुत्री मनरीत कौर हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी सेना में विभिन्न पदों पर देशसेवा में जुटे हैं।भाई हरदेव सिंह ने बताया कि बलदेव सिंह पिछले 22 वर्षों से सेना में थे। वे बहुत मिलनसार और सहज स्वभाव के थे। नवंबर 2024 में वह अंतिम बार छुट्टी पर घर आए थे। उनकी शहादत पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और दुख दोनों का विषय बनी हुई है।







