सिरसा 21 मार्च — शम्भू और खनौरी बार्डर से किसानों को हटाए जाने और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल सहित किसानों की गिरफ्तारी के विरोध को लेकर सिरसा में किसानों का गुस्सा फूट गया। विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े किसान सिरसा के लघु सचिवालय पहुंचे और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए पुतला फूंका। सुरक्षा की दृष्टि से काफी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया था। किसानों का कहना है कि एमएसपी सहित जो भी उनकी मांगे हैं उनको लेकर वो आगे भी संघर्ष करेंगे और अपनी मांगे माने जाने तक उनका ये संघर्ष जारी रहेगा।
मीडिया से बातचीत में किसान हंसराज और गुरलाल ने कहा कि पिछले तकरीबन एक साल से किसान शम्भू और खनोरी बॉर्डर पर शांतिपूर्ण धरना लगा कर बैठे थे लेकिन कल उनको वहां से हटा दिया गया और उनके नेताओं सहित किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि पंजाब सरकार केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए कल किसानों को बुलाया गया था लेकिन उसके तुरंत बाद पंजाब सरकार ने किसानों के धरने पर लगे टेंटो और अन्य सामान को वहां से हटा दिया जिससे किसानों का भारी नुकसान भी हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगो को लेकर संघर्षरत रहे हैं और आगे भी अपनी मांगो के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे।
किसान नेताओं ने बताया कि एमएसपी गारंटी कानून सहित किसानों की दर्जनों मांगों को लेकर धरनारत किसानों को पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा धोखे से मीटिंग में बुलाकर व चोरी-छिपे बॉर्डर खाली करवाने के विरोध में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए भगवंत मान सरकार का पुतला फूंका। किसानों ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ रोष जाहिर करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार हुआ है, जबकि किसी मुख्यमंत्री ने इस प्रकार के हथकंडे अपनाकर किसानों को जबरन बॉर्डर से हटाया हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से एमएसपी गारंटी कानून सहित तमाम मांगों को लेकर 7वें दौर की वार्ता चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पहले धोखे से किसानों को मीटिंग के लिए बुलाया और पीछे से दोनों बॉर्डरों शंभू व खनौरी पर शांतिपूर्वक तरीके से बैठे किसानों को हिरासत में लेकर किसानों की पीठ में छुर्रा घोंपने का काम किया है, जिसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार ने ये घिनौना कृत्य किसके इशारे पर किया है, ये सोचने वाली बात है, क्योंकि जो मुख्यमंत्री कल तक किसानों के हित की बात करता था, आज वो किसानों का विरोधी कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का ये निर्णय कतई बर्दाश्त योग्य नहीं है। उन्होंने पंजाब सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द हिरासत में लिए गए किसानों को नहीं छोड़ा गया तो किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।







