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हर साल हजारों युवा डंकी रूट से जाते है विदेश.. हरियाणा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक

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करनाल  4 फरवरी (TSN)-हरियाणा सरकार ने युवाओं को अवैध रूप से विदेश भेजने वाले अवैध डंकी एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया हुआ है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को डंकी के रास्ते लोगों को विदेश भेजने वाले एजेंटों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। यह कदम प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है, किन्तु आंकड़ो के मुताबिक इनके अभी भी बढ़ोतरी हो रही है।
 डंकी रूट आखिर है क्या:
डंकी रूट एक अवैध तरीका है, जिसमें एजेंट अवैध रास्तों से लोगों को विदेश भेजते हैं। इस रूट में कई बार युवाओं को जंगलों, नदियों और पहाड़ों के खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है। हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां इस रास्ते से विदेश भेजे गए लोगों को जान से मारने की धमकियां मिलीं या वे धोखाधड़ी का शिकार हुए।
करनाल के अमित की डंकी रूठ की गाथा:
करनाल के गांव गोघड़ीपुर निवासी अमित मान का कहना है कि कोई भी युवा विदेश जाने के लिए डंकी रूट का इस्तेमाल ना करे,यह एक निहायत ही खतरनाक और मौ.त का रास्ता है।इसमें कोई भी एजेंट मदद नहीं करता है। मैंने अपनी तीन माह लंबी डंकी रूट की यात्रा के दौरान जंगल में मानव कंकाल देखे। यह कंकाल उन लोगों के थे. इस रास्ते से जाने के दौरान अपने एजेंट से किसी कारण से बिछड़ गए थे। अमित ने बताया कि करीब 42 लाख रुपये खर्च कर डंकी रूट से गया था। करीब 22 माह अमित अपनी यात्रा का दृष्टांत बताते समय काफी डरा हुआ नजर आया। उसने बताया, गांव के काफी युवा अमेरिका गए हुए हैं। वह भी अमेरिकी डॉलरों के आकर्षण में फंस गया।उसने अपनी तीन बीघा जमीन बेच दी और मकान भी गिरवी रख दिया। वह 17 अप्रैल 2023 को डंकी रूट से अमेरिका जाने के लिए घर से निकल गया। एजेंट उसे कई देशों के जंगल, नदियों व पहाड़ों के रास्ते ले जा रहा था। रास्ता बहुत खतरनाक था।
डंकी रूट के सफर में कई साथियों ने तोड़ा दम:
जंगल में उसे मानव कंकाल नजर आए। करीब तीन महीने के सफर के बाद वह 6 जुलाई 2023 को अमेरिका की दीवार फांद पाया। अमित के अनुसार, उसे जंगल में कई बार भूखा रहना पड़ा। इस दौरान किसी का साथ नहीं देता वह आगे चलता है। जो उसके साथ चल रहा है तो वह जंगल पार कर सकता है, जो पीछे रहे गया वह छूट जाता है।किसी के बीमार होने व चोट लगने पर कोई नही रुकता है। एजेंट उसे छोड़कर आगे बढ़ जाता है। चूंकि यह यात्रा अवैध है तो विभिन्न देशों की सीमाओं पर स्थानीय पुलिस पैसे छीन लेती है।
अमित के आग्रह पर राहुल गांधी अमित के घर आये:
अमेरिका में एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने बाद उनके परिजन तजिंदर मान की मदद से वो अस्पताल में मिला, उन्ही के साथ आये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता  राहुल गांधी उनसे मिले।इस दौरान अमित ने अपने घर करनाल जाने का आग्रह किया था।  राहुल 20 सितंबर 2024 को राहुल गांधी घोघड़ीपुर आए थे। अमित अमेरिका में ट्रक चलाता था। 21 मई 2024 को अमेरिका में उसके साथ हादसा हो गया था। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। करीब 22 दिन तक

करनाल  4 फरवरी (TSN)-हरियाणा सरकार ने युवाओं को अवैध रूप से विदेश भेजने वाले अवैध डंकी एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया हुआ है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को डंकी के रास्ते लोगों को विदेश भेजने वाले एजेंटों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। यह कदम प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है, किन्तु आंकड़ो के मुताबिक इनके अभी भी बढ़ोतरी हो रही है।
 डंकी रूट आखिर है क्या:
डंकी रूट एक अवैध तरीका है, जिसमें एजेंट अवैध रास्तों से लोगों को विदेश भेजते हैं। इस रूट में कई बार युवाओं को जंगलों, नदियों और पहाड़ों के खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है। हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां इस रास्ते से विदेश भेजे गए लोगों को जान से मारने की धमकियां मिलीं या वे धोखाधड़ी का शिकार हुए।
करनाल के अमित की डंकी रूठ की गाथा:
करनाल के गांव गोघड़ीपुर निवासी अमित मान का कहना है कि कोई भी युवा विदेश जाने के लिए डंकी रूट का इस्तेमाल ना करे,यह एक निहायत ही खतरनाक और मौ.त का रास्ता है।इसमें कोई भी एजेंट मदद नहीं करता है। मैंने अपनी तीन माह लंबी डंकी रूट की यात्रा के दौरान जंगल में मानव कंकाल देखे। यह कंकाल उन लोगों के थे. इस रास्ते से जाने के दौरान अपने एजेंट से किसी कारण से बिछड़ गए थे। अमित ने बताया कि करीब 42 लाख रुपये खर्च कर डंकी रूट से गया था। करीब 22 माह अमित अपनी यात्रा का दृष्टांत बताते समय काफी डरा हुआ नजर आया। उसने बताया, गांव के काफी युवा अमेरिका गए हुए हैं। वह भी अमेरिकी डॉलरों के आकर्षण में फंस गया।उसने अपनी तीन बीघा जमीन बेच दी और मकान भी गिरवी रख दिया। वह 17 अप्रैल 2023 को डंकी रूट से अमेरिका जाने के लिए घर से निकल गया। एजेंट उसे कई देशों के जंगल, नदियों व पहाड़ों के रास्ते ले जा रहा था। रास्ता बहुत खतरनाक था।
डंकी रूट के सफर में कई साथियों ने तोड़ा दम:
जंगल में उसे मानव कंकाल नजर आए। करीब तीन महीने के सफर के बाद वह 6 जुलाई 2023 को अमेरिका की दीवार फांद पाया। अमित के अनुसार, उसे जंगल में कई बार भूखा रहना पड़ा। इस दौरान किसी का साथ नहीं देता वह आगे चलता है। जो उसके साथ चल रहा है तो वह जंगल पार कर सकता है, जो पीछे रहे गया वह छूट जाता है।किसी के बीमार होने व चोट लगने पर कोई नही रुकता है। एजेंट उसे छोड़कर आगे बढ़ जाता है। चूंकि यह यात्रा अवैध है तो विभिन्न देशों की सीमाओं पर स्थानीय पुलिस पैसे छीन लेती है।
अमित के आग्रह पर राहुल गांधी अमित के घर आये:
अमेरिका में एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने बाद उनके परिजन तजिंदर मान की मदद से वो अस्पताल में मिला, उन्ही के साथ आये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता  राहुल गांधी उनसे मिले।इस दौरान अमित ने अपने घर करनाल जाने का आग्रह किया था।  राहुल 20 सितंबर 2024 को राहुल गांधी घोघड़ीपुर आए थे। अमित अमेरिका में ट्रक चलाता था। 21 मई 2024 को अमेरिका में उसके साथ हादसा हो गया था। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। करीब 22 दिन तक वह बेहोश रहा। जब उसे होश आया तो उसने अपने परिजनों को यह बात बताई।
अमित की माँ वेदमती की जुबानी:
अमित की माँ वेदमती ने बताया कि अगर हमें पहले से पता होता कि डंकी का रास्ता इतना खतरनाक व तखलीफ़ देने वाला है तो हम कभी भी अपने बच्चे को इस तरीके से अमेरिका ना भेजते। घर के हालात अच्छे ना होने के कारण हमने अमित को भेजा था। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने अमेरिका में अमित से किया हुआ अपना वादा निभाया और  वो हमसे मिलने करनाल आये थे। उनके द्वारा हर सम्भव मदद का आश्वासन मिला और मदद मिल भी रही है।

बेहोश रहा। जब उसे होश आया तो उसने अपने परिजनों को यह बात बताई

अमित की माँ वेदमती ने बताया कि अगर हमें पहले से पता होता कि डंकी का रास्ता इतना खतरनाक व तखलीफ़ देने वाला है तो हम कभी भी अपने बच्चे को इस तरीके से अमेरिका ना भेजते। घर के हालात अच्छे ना होने के कारण हमने अमित को भेजा था। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने अमेरिका में अमित से किया हुआ अपना वादा निभाया और  वो हमसे मिलने करनाल आये थे। उनके द्वारा हर सम्भव मदद का आश्वासन मिला और मदद मिल भी रही है।

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