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ISRO की भर्ती परीक्षा में पूरे भारत में पारस नेहरा का चौथा रैंक..डेढ़ लाख युवाओं ने आजमाई थी किस्मत

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25 दिसंबर, यमुनानगर- यमुनानगर जिले के टोपरा कलां के रहने वाले पारस नेहरा ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम हासिल की है। पारस नेहरा ने इसरो की परीक्षा में चौथा रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने  परिवार, गांव, बिरादरी बल्कि पूरे हरियाणा का नाम रोशन कर दिया। उसकी इस उपलब्धि से पूरा परिवार गदगद है। इसरो के लिए डेढ़ लाख युवाओं ने किशन आजमाई थी जिनमें से 153 युवाओं का चयन हुआ है। लेकिन  खुशी की बात यह है कि पारस नेहरा को पूरे भारत में चौथा रैंक हासिल हुआ है। फिलहाल पारस घर से बाहर है लेकिन उसकी इस उपलब्धि पर परिवार ने केक काटकर खुशी मनाई और वीडियो कॉल कर पारस नेहरा को इस बड़ी जीत के लिए केक भी खिलाया।
पारस नेहरा की उपलब्धि
 पारस नेहरा ने साल 2016 में फरीदाबाद के विद्या निकेतन स्कूल से नॉन मेडिकल की 12वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की उसके बाद साल 2020 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक से मैकेनिकल इंजीनियर से बीटेक की डिग्री भी फर्स्ट डिवीजन से पास की जिसमें उन्हें यूनिवर्सिटी स्तर पर गोल्ड मेडल भी मिला। उन्होंने साल 2022 में आईआईटी गुवाहाटी से प्लयूड एंड थर्मल सब्जेक्ट में m.tech की डिग्री हासिल की। मैकेनिकल डिजाइन में साल 2024 में आईआईटी दिल्ली से m. Tech की डिग्री फर्स्ट डिवीजन में पास की। फरवरी 2024 में उन्होंने इस पोस्ट के लिए लिखित परीक्षा दी जिसमें उनका अब चयन हुआ है।
पारस नेहरा के चौथा रैंक हासिल करने पर परिवार उनकी कड़ी मेहनत बता रहा है। पारस नेहरा की मां सुदेश नेहरा का कहना है कि वह हमेशा फर्स्ट रैंक की बात करता था। हालांकि उनका कई विकल्प मिले लेकिन वह चाहता था कि मैं कुछ ऐसा काम करूं जिससे देश का नाम भी रोशन हो। पारस नेहरा के चाचा सुखबीर का कहना है कि पारस नेहरा हमेशा से ही सरकारी नौकरी करने की बात कहता था वह कहता था कि मैं कुछ ऐसा काम करूं जिससे देश की प्रगति में मेरा भी योगदान रहे। उन्होंने कहा कि पारस नेहरा के अथक परिश्रम का रिजल्ट उनकी माता को जाता है। क्योंकि उन्होंने परस मेहता के लिए बहुत कुछ न्योछावर किया।

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